प्रयागराज : प्रयागराज से एक दिलचस्प और चर्चा में रहने वाला सियासी–प्रशासनिक वाकया सामने आया है। माघ मेले की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने हल्के-फुल्के अंदाज में प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की चुटकी ली, जिसका वीडियो और बयान अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
दरअसल, डिप्टी सीएम सोमवार को प्रयागराज पहुंचे थे। उन्होंने संगम नोज पर माघ मेले की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और डीएम तथा मेला अधिकारियों से तैयारियों की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद जब वे कार में बैठने लगे, तो उन्होंने अफसरों को अपने पास बुलाया। इस दौरान एक पैर कार में और दूसरा पायदान पर रखकर खड़े डिप्टी सीएम ने ट्रैफिक जाम की ओर इशारा करते हुए कहा, “ये जो जाम लग रहा है, इसे देखो। सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में मत पड़ो।”
डिप्टी सीएम की इस टिप्पणी पर डीएम मनीष कुमार वर्मा समेत वहां मौजूद अधिकारी मुस्कुरा उठे। दरअसल, यह टिप्पणी हाल ही में वायरल हुए उस वीडियो से जुड़ी थी, जिसमें डीएम मनीष वर्मा माघ मेले के निरीक्षण के दौरान सतुआ बाबा के आश्रम में चूल्हे पर रोटी बनाते नजर आए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था।
बताया जाता है कि 24 दिसंबर को डीएम मनीष वर्मा अधिकारियों के साथ माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान वे संतोषदास जी महाराज, जिन्हें सतुआ बाबा के नाम से जाना जाता है, के शिविर में गए थे। वहां डीएम ने कोट पहने हुए चूल्हे पर रोटी बनाई, जबकि सतुआ बाबा उन्हें तरीका बताते दिखाई दिए। सतुआ बाबा ने बाद में इसे सेवा और भक्ति भाव का प्रतीक बताया था।
हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद जमीन आवंटन और सुविधाओं को लेकर आंदोलन कर रहे कई साधु-संतों ने डीएम पर तंज कसे थे। संतों का कहना था कि एक ओर वे जमीन और व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डीएम एक खास संत के शिविर में रोटी सेंकते नजर आ रहे हैं।
सोमवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सर्किट हाउस में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के साथ बैठक भी की। उन्होंने निर्देश दिए कि माघ मेले को मिनी कुंभ की तर्ज पर तैयार किया जाए और 3 जनवरी तक सभी कार्य हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाए, लेकिन श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
डिप्टी सीएम ने कहा कि माघ मेला केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, सामाजिक अनुशासन और प्रशासनिक क्षमता का प्रतीक है। प्रमुख स्नान पर्वों पर विशेष सतर्कता, बेहतर भीड़ प्रबंधन और मजबूत यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
