मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के सकौती टांडा में आयोजित भव्य जाट सम्मेलन ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाले कई अहम फैसले लिए। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में 50 से अधिक देशों से जाट समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और एकजुटता के साथ समाज के उत्थान का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान हिंदू हृदय सम्राट, वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की 20 फीट ऊंची प्रतिमा का भव्य अनावरण भी किया गया, जिसे लगभग 20 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
सम्मेलन में सामाजिक सुधार, शिक्षा, आरक्षण और एकता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इंटरनेशनल जाट संसद के मंच से कुल 11 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिन्हें जाट समाज के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन प्रस्तावों में सबसे ज्यादा चर्चा विवाह संबंधी फैसलों को लेकर रही। सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि जाट युवक-युवतियों की शादी 23 से 25 वर्ष की आयु के बीच की जानी चाहिए। साथ ही अंतरजातीय विवाह पर पूर्ण रूप से रोक लगाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिस पर सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में समर्थन जताया।
इसके अलावा युवाओं को अपने इतिहास और महापुरुषों के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि जाट समाज के युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास का अध्ययन करना चाहिए और महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि को उत्साहपूर्वक मनाना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में भी युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए टेक्निकल और स्किल एजुकेशन के साथ उच्च शिक्षा और व्यापार में भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई।
सम्मेलन में समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने का भी संकल्प लिया गया। युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि समाज के जो लोग उच्च पदों पर हैं, वे निस्वार्थ भाव से समाज के कमजोर वर्गों की मदद करें।
आरक्षण के मुद्दे पर भी सम्मेलन में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। यह तय किया गया कि जिन राज्यों में जाट समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का दर्जा नहीं मिला है, वहां इसके लिए संगठित प्रयास किए जाएंगे। साथ ही जाट महापुरुषों के इतिहास को शिक्षा व्यवस्था में शामिल कराने के लिए NCERT और CBSE के पाठ्यक्रमों में इसे शामिल कराने की दिशा में अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन में 36 बिरादरियों के साथ सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने और क्षेत्रवाद व गोत्रवाद से ऊपर उठकर पूरे जाट समाज को एक सूत्र में बांधने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की ताकत उसकी एकता में ही निहित है और यदि सभी मिलकर काम करें तो समाज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भगवंत मान की उपस्थिति ने सम्मेलन को और भी खास बना दिया। इसके अलावा नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने भी मंच से समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया।
हनुमान बेनीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि जाट समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और महाराजा सूरजमल जैसे महान योद्धा आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी कोने में रहने वाले जाटों का डीएनए एक ही है और सभी को संगठित होकर समाज के हित में काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जाट राजनीति को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन यदि समाज एकजुट रहा तो वह फिर से मजबूत स्थिति में आ सकता है।
सम्मेलन में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया गया और कहा गया कि जब समाज एकजुट हुआ, तब उसने देश को एक मजबूत नेतृत्व दिया। वक्ताओं ने आह्वान किया कि उसी एकता को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि समाज अपने अधिकारों और सम्मान के लिए मजबूती से खड़ा हो सके।
इस भव्य आयोजन ने न केवल सामाजिक मुद्दों पर चर्चा को दिशा दी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि जाट समाज आने वाले समय में संगठित होकर अपनी पहचान और अधिकारों के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। सम्मेलन में पारित प्रस्तावों और दिए गए संदेशों को समाज के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
