लखनऊ/हरदोई : जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात, जिस पर हर नवविवाहित जोड़ा सपने सजाता है, वह रात नवविवाहिता लक्ष्मी के लिए हमेशा के लिए खौफनाक याद बन गई। रात को सात फेरों के साथ शुरू हुआ एक नया जीवन सुबह एक दर्दनाक मोड़ पर खत्म हो गया। दूल्हा नीरज की मौत ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया। शादी के अगले ही दिन सुहागरात की सेज पर इंतजार करती रही दुल्हन, लेकिन नीरज की जगह पहुंची उसकी लाश।
बिना बताए घर से निकला, मिला पेड़ से लटका शव
मामला हरदोई जिले के गौराडांडा गांव के कोडरा मजरे का है। यहां के निवासी 22 वर्षीय नीरज की शादी नवपुरवा अंटवा गांव की लक्ष्मी से धूमधाम से हुई थी। दिन भर रस्मों और रीति-रिवाजों का दौर चलता रहा। परिवार के लोग खुशी से झूम रहे थे। लेकिन इसी बीच देर शाम नीरज अचानक बिना किसी को कुछ बताए घर से बाहर चला गया। परिजन यही समझते रहे कि वह पत्नी के साथ अपने कमरे में है। लेकिन हकीकत से वे अनजान थे। सुबह गांव के कुछ लोग जब शौच के लिए बाहर निकले, तो घर से लगभग 200 मीटर दूर आम के बाग में नीरज का शव पेड़ से लटकता मिला।
परिवार में कोहराम, नहीं पता मौत की वजह
घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर के नीरज की मौत से माता-पिता और अन्य रिश्तेदार बेसुध हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक टीम के साथ जांच शुरू की। हरियावां क्षेत्राधिकारी (CO) संतोष सिंह के मुताबिक, फॉरेंसिक टीम ने मौके से आवश्यक नमूने इकट्ठा किए हैं। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन अभी कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है। परिजन भी फिलहाल मौत के कारणों से अनजान हैं।
दुल्हन लक्ष्मी की टूटी दुनिया, एक रात में उजड़ा सुहाग
लक्ष्मी के लिए यह घटना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं। वह तो नीरज के साथ सात जन्मों का साथ लेकर अपने मायके की देहरी पार कर ससुराल आई थी। रात वह सज-धज कर अपने पति के साथ पहली रात बिताने को तैयार थी। परिजनों ने उसे उसके कमरे में भेज दिया था, लेकिन नीरज वहां पहुंचा ही नहीं। लक्ष्मी पूरी रात उसके इंतजार में रही, लेकिन वह नहीं आया। अकेलेपन में वह किसी से पूछ भी नहीं सकी। सुबह जो खबर आई, उसने उसके होश उड़ा दिए — उसका सुहाग उजड़ चुका था।
अभी अनसुलझा है रहस्य, पुलिस जांच में जुटी
नीरज की आत्महत्या की गुत्थी अभी सुलझ नहीं पाई है। पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। क्या मानसिक तनाव था? क्या किसी बाहरी दबाव ने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर किया? या इसके पीछे कोई और राज छिपा है? परिजन और ग्रामीणों के अनुसार, नीरज का स्वभाव सामान्य और मिलनसार था। ऐसे में यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है।
