हर साल दुनिया में 80 लाख और भारत में 13 लाख से अधिक मौतें
हर साल 31 मई को दुनिया भर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल तंबाकू के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने का अवसर है, बल्कि यह मानवता के समक्ष तंबाकू के कारण पैदा होने वाली स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक त्रासदी पर पुनर्विचार करने का भी वक्त है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वर्ष की थीम “Protecting children from tobacco industry interference” यानि “तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बच्चों की रक्षा” दी है।
बरेली में तंबाकू से मौत, स्थानीय चेतावनी का संकेत
यूपी के बरेली में भी हाल ही में तंबाकू जनित रोग से हुई एक व्यक्ति की मृत्यु ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बरेली में हर साल सैकड़ों लोग तंबाकू के सेवन से होने वाले कैंसर, दिल की बीमारी और श्वसन रोगों का शिकार होते हैं। मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि “80% मुंह के कैंसर के मामलों की जड़ तंबाकू उत्पादों में छिपी होती है।”ताजा मामला नवाबगंज क्षेत्र के निवासी रामनरेश (उम्र 55) का है, जिनकी हाल ही में तंबाकू जनित कैंसर के कारण मृत्यु हो गई। वह पिछले 20 वर्षों से गुटखा और खैनी का सेवन कर रहे थे। परिवार ने बताया कि उन्हें 6 महीने पहले मुंह में अल्सर हुआ था, लेकिन डॉक्टरों ने पुष्टि की कि यह मुंह का कैंसर है जो धीरे-धीरे लाइलाज हो गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब बरेली में भी युवाओं में तंबाकू की लत खतरनाक रूप से बढ़ रही है, खासकर स्कूली बच्चों में पान मसाला, ई-सिगरेट और वेपिंग का चलन तेजी से बढ़ा है।
तंबाकू एक धीमा ज़हर
तंबाकू का सेवन, चाहे वह बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, गुटखा, पान मसाला या ई-सिगरेट के रूप में हो। यह एक धीमा ज़हर है, जो शरीर को अंदर ही अंदर खत्म करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण 13 लाख से अधिक मौतें होती हैं। यह केवल कैंसर नहीं, बल्कि हृदय रोग, सांस की बीमारी, गर्भवती महिलाओं में जटिलताएं, और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी तंबाकू के कारण बढ़ रही हैं।
भारत में हर दिन 3500 से अधिक तंबाकू से मौतें
WHO के अनुसार के दुनिया में हर साल लगभग 80 लाख (8 मिलियन) लोगों की मौत तंबाकू के कारण होती है। इनमें से 70 लाख से अधिक लोग सीधे तंबाकू के सेवन से मरते हैं, जबकि 13 लाख लोग (1.3 मिलियन) पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं से प्रभावित होकर मरते हैं। हर 5 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। तंबाकू विश्व की शीर्ष 5 मृत्यु कारणों में शामिल है। हालांकि, भारत में हर साल तंबाकू के कारण 13 लाख से अधिक मौतें होती हैं। हर दिन लगभग 3500 से ज्यादा लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण दम तोड़ते हैं। भारत में मुंह और फेफड़ों का कैंसर सबसे अधिक तंबाकू के कारण होता है।
तंबाकू से यह होती हैं बीमारियाँ
तंबाकू से फेफड़ों का कैंसर होता है। इसके साथ ही मुंह, गले और होंठ का कैंसर, दिल की बीमारियाँ (हृदयाघात), स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), अस्थमा, महिलाओं में गर्भपात और बच्चों में जन्म दोष, पैसिव स्मोकिंग (Second-hand Smoke), बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका गंभीर असर होता है।, घर और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने से नॉन-स्मोकर्स भी जोखिम में आ जाते हैं।
यह हैं समाधान और रोकथाम
तंबाकू पर सख्त टैक्स और कानून बनाने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। स्कूलों के पास बिक्री पर रोक लगे। परामर्श केंद्र और सहायता अभियान, बड़े पैमाने पर जागरूकता और शिक्षा की जरूरत। बच्चे और युवा सबसे बड़ी चपेट में हैं। आज तंबाकू कंपनियों की रणनीति बदल गई है। वे रंगीन पैकेजिंग, मीठे फ्लेवर, सोशल मीडिया प्रचार के जरिए बच्चों और युवाओं को निशाना बना रही हैं। स्कूल-कॉलेज के आस-पास बिकते गुटखा और ई-सिगरेट के रूप युवा जाल में फँस जाते हैं। यह केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी का भविष्य खतरे में डालने जैसा अपराध है।
कानून हैं, लेकिन पालन नहीं
भारत में COTPA (Cigarettes and Other Tobacco Products Act, 2003) और FSSAI द्वारा प्रतिबंधित गुटखा बिक्री जैसे कानून हैं, लेकिन इनका अनुपालन बेहद कमजोर है। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान, स्कूल के पास गुटखा बिक्री, विज्ञापन सब जारी हैं। ज़मीनी स्तर पर कड़ी निगरानी और कठोर कार्यवाही आवश्यक है।
स्वास्थ्य बनाम मुनाफा
तंबाकू उद्योग अरबों का व्यापार करता है, लेकिन उसका बोझ जन स्वास्थ्य प्रणाली और गरीब परिवारों पर पड़ता है। एक गरीब व्यक्ति इलाज के लिए जमीन बेच देता है, लेकिन तंबाकू कंपनियाँ लाभ में रहती हैं। यह असमानता और शोषण का सबसे कटु उदाहरण है।
![]()
