स्कूल गईं थीं पढ़ने, रात तक घर नहीं लौटीं, सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी पुलिस
बरेली : यूपी के बरेली से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। देहात के विशारतगंज थाना क्षेत्र के इस्माईलपुर गांव निवासी नरेंद्र पाल की तीन नाबालिग बेटियां स्कूल जाने के बाद से लापता हैं। देर रात तक उनके घर न लौटने पर परिजनों ने परेशान होकर अलीगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर खोजबीन शुरू कर दी है।
सुबह निकली थीं स्कूल, लेकिन देर रात तक नहीं लगा सुराग
परिजनों के मुताबिक तीनों बच्चियां भावना (16 वर्ष), चांदनी (12 वर्ष) और गौरी (10 वर्ष) सुबह लगभग 9:30 बजे रोज़ की तरह पढ़ाई के लिए प्रताप समाज कल्याण इंटर कॉलेज, रुद्रपुर गौटिया गई थीं। यह अलीगंज थाना क्षेत्र में स्थित है। मगर, वह शाम तक जब वह घर नहीं लौटीं, तो परिवार वालों की चिंता बढ़ गई। उन्होंने स्कूल, रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में पूछताछ की, लेकिन बच्चियों का कोई सुराग नहीं मिला।
पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट, शुरू किया सघन तलाशी अभियान
पीड़ित पिता ने अलीगंज थाने में तीनों बेटियों की गुमशुदगी की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चला रही है और स्कूल एवं आसपास की दुकानों-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाल रही है।
पुलिस ने जारी की पहचान
बरेली देहात की विशारतगंज थाना पुलिस ने तीनों बच्चियों की पहचान जारी की है। इसमें भावना पाल का रंग सावला, कद 4 फीट 5 इंच,आंखें काली,सफेद सलवार-सूट और चुन्नी, पैरों में जूते पहनी थी। इसके साथ ही चांदनी पाल का रंग गोरा, कद 4 फीट 4 इंच, आंखें काली, सफेद सलवार-सूट और चुन्नी, पैरों में जूते पहनी थी, जबकि गौरी पाल का रंग गोरा, कद 3 फीट 6 इंच, सफेद टी-शर्ट, स्लेटी स्कर्ट, काला पायजामा, नीली चप्पलें पहनी थी।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, लोगों से सहयोग की अपील
तीनों बच्चियों के लापता होने से घर में कोहराम मचा हुआ है। माता-पिता और परिजन बदहवास हैं और हर गुजरते पल के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। उन्होंने आम जनता और मीडिया से सहयोग की अपील की है कि यदि कहीं इन बच्चियों को देखा गया हो तो तुरंत नजदीकी थाने या 112 नंबर पर सूचना दें। पुलिस प्रशासन ने भी जनता से अपील की है कि अगर कोई भी सुराग या जानकारी मिलती है तो गोपनीयता बनाए रखते हुए उसे साझा करें। जिससे बच्चियों को सुरक्षित और शीघ्र वापस लाया जा सके।
