लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को एक अहम बयान देते हुए कहा है कि देश की डिजिटल संप्रभुता और साइबर सुरक्षा को लेकर सरकार को कहीं अधिक सजग और आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। उन्होंने वर्तमान तकनीकी दौर में डेटा सुरक्षा और विदेशी कंपनियों के बढ़ते वर्चस्व पर चिंता जताई। सपा प्रमुख ने कहा कि आज जबकि हर हाथ में मोबाइल, और लगभग हर सार्वजनिक तथा निजी गतिविधि इंटरनेट से संचालित हो रही है, चाहे वह बैंकिंग हो, संचार हो या फिर सरकारी कार्य, ऐसे में कम्युनिकेशन और साइबर सुरक्षा सबसे संवेदनशील विषय बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि साइबर क्राइम में बढ़ोत्तरी, बड़े कॉर्पोरेट सिस्टम्स का हैक होना और आम नागरिक का ठगा जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार को तकनीकी नियंत्रण अपने हाथ में रखना ही चाहिए।
“विदेशी टेक्नोलॉजी जरूरी हो सकती है, लेकिन आत्मनिर्भरता उससे भी जरूरी”
पूर्व सीएम ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग को आवश्यक बताते हुए भी पूर्ण निर्भरता के ख़तरों पर चेताया। उन्होंने कहा कि “भले ही तकनीकी विकास वैश्विक प्रक्रिया हो, लेकिन यह ज़रूरी है कि भारत सरकार इन सेवाओं पर निर्णायक नियंत्रण बनाए रखे। सरकार को आपातकालीन स्थिति में विदेशी टेक कंपनियों के संचालन को नियंत्रित करने की क्षमता होनी चाहिए।”उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध कभी स्थायी नहीं होते, और तकनीक किसी व्यक्तिगत भरोसे का विषय नहीं बन सकती। ऐसे में भारत को अपनी तकनीकी स्वायत्तता पर विशेष बल देना चाहिए।
स्थानीय कारोबारियों के साथ दोहरा रवैया ?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर स्थानीय कारोबारियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। बोले, “एक तरफ़ सरकार अपनी एजेंसियों का दुरुपयोग करके छोटे-बड़े कारोबारियों को डराती है, कमीशन माँगती है और उन्हें हतोत्साहित करती है, दूसरी ओर विदेशी कंपनियों के लिए रेड कारपेट बिछाया जाता है।”उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक देश के व्यापारी सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तब तक भारत में रिसर्च, उत्पादन और तकनीकी नवाचार का सकारात्मक माहौल कैसे बनेगा?
आयात-निर्यात असंतुलन और बेरोज़गारी पर भी उठाए सवाल
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने चीन जैसे देशों से बढ़ते आयात और देश के निर्यात घाटे को लेकर भी सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के अभाव में देश बेरोजगारी और व्यापार घाटे का शिकार बना रहेगा। “अगर हमारी कंपनियाँ सिर्फ़ विदेशी ब्रांड्स की एजेंट बनकर रह गईं, तो उत्पादन घटेगा और बेरोज़गारी बढ़ेगी।”उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि भारत को ‘अपने उत्पाद, अपनी सेवाएँ’ जैसे संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। जिससे हर वर्ग को काम मिले, और अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
सांस्कृतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर बल
अंत में उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्य, आत्मनिर्भरता और समावेशी सोच में निहित है।
