कांग्रेस कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा – मुस्लिम क्रांतिकारियों के योगदान को सामने लाना समय की ज़रूरत
लखनऊ : उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में सोमवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण गोष्ठी में ‘जंग- ए- आज़ादी में मुस्लिम क्रांतिकारियों का बलिदान’ पुस्तक पर चर्चा हुई। इस अवसर पर वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश की आज़ादी में मुस्लिम क्रांतिकारियों की भूमिका को सामने लाना देश की एकता, अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है। गोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित पूर्व शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. मसूद अहमद ने कहा कि “मौजूदा सांप्रदायिक माहौल में मुस्लिम समाज के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करना ज़रूरी है। मृदुल कुमार सिंह द्वारा लिखी गई यह पुस्तक इस दिशा में एक साहसिक और ऐतिहासिक प्रयास है।”
आरएसएस पर तीखा हमला

पुस्तक के लेखक मृदुल कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा,“आरएसएस का एक भी व्यक्ति स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल नहीं हुआ। आज जो संगठन देशभक्ति की ठेकेदारी कर रहे हैं, उनके पास आज़ादी की लड़ाई में हिस्सेदारी का कोई प्रमाण नहीं है।” उन्होंने कहा कि “आरएसएस ने देश को विभाजन और साम्प्रदायिकता के रास्ते पर डाला जबकि मुस्लिमों ने हिन्दुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष किया।”
युवाओं तक पहुंचाने की अपील
ओबीसी कांग्रेस के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि यह पुस्तक आरएसएस द्वारा दिग्भ्रमित युवाओं को सच्चाई बताने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की ज़रूरत है।
क्रांतिकारियों की सूची बेहद अहम
कांग्रेस शहर अध्यक्ष डॉ. शहज़ाद आलम ने कहा कि “पुस्तक में यूपी के उन मुस्लिम क्रांतिकारियों की सूची है। जिन्हें काला पानी की सजा हुई थी। यह दस्तावेज़ी प्रमाण आज के झूठे प्रचार को करारा जवाब देता है।”
राजनीतिक हथियार के रूप में पुस्तक
अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शमीम खान ने कहा कि “आरएसएस की विभाजनकारी राजनीति का मुकाबला करने के लिए यह किताब एक तथ्यों पर आधारित हथियार है।” मुहम्मद उमैर और विजय बहादुर यादव ने कहा कि “यह किताब मुस्लिम विरोधी दुष्प्रचार का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जवाब देती है। इसे स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक पहुंचाया जाना चाहिए।”
सरकार से सड़कों के नामकरण की मांग
नावेद नक़वी और हम्माम वहीद ने मांग की कि “पुस्तक में जिन क्रांतिकारियों का उल्लेख है। उनके नाम पर सड़कें और पार्कों का नाम रखा जाए। यह उनके बलिदान को सम्मान देने का सच्चा तरीका होगा।” गोष्ठी में अलीमुल्ला खान, नसीम खान, नोमान अहमद, रामचंद्र राम, शबाब रज़ा, इरफानुल्ला, अजय वर्मा, शमशेर अली, काशिफ सिद्दीक़ी, मोहम्मद जाहिद सहित कई प्रमुख नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। गोष्ठी का संचालन शमसुल हसन (अल्पसंख्यक कांग्रेस, पूर्व प्रदेश महासचिव) ने किया।
