मुहम्मद साजिद
2 जुलाई, भारतीय इतिहास का एक ऐसा दिन है। जिसे “गुलामी की औपचारिक शुरुआत” के रूप में याद किया जाना चाहिए। यह वह दिन था, जब बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब सिराजुद्दौला की हत्या कर दी गई, और उसके साथ ही भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के राज का पहला अध्याय लिख दिया गया।
प्लासी की हार और विश्वासघात की पटकथा
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23 जून, 1757 को प्लासी का युद्ध हुआ। जिसमें नवाब सिराजुद्दौला की सेना को रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी फौज ने पराजित कर दिया। लेकिन यह सिर्फ सैन्य हार नहीं थी। यह भारत के अपने लोगों द्वारा किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात भी था। नवाब के सेनापति मीर जाफर ने लालच और सत्ता के लिए अंग्रेजों से मिलकर गद्दारी की, जिससे यह युद्ध नवाब के लिए एकतरफा साबित हुआ।
2 जुलाई 1757: जब सिराजुद्दौला की हत्या हुई
प्लासी की हार के कुछ दिनों बाद, 2 जुलाई को नवाब सिराजुद्दौला को पकड़ लिया गया और नमक हराम देवड़ी में उनकी हत्या कर दी गई। इस हत्या को अंजाम दिया मोहम्मद अली बेग ने, जो मीर जाफर और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए एक गुप्त समझौते का हिस्सा था। यह हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं थी। यह भारत के स्वतंत्र शासन की हत्या थी। एक ऐसी घटना जिसने ब्रिटिश राज को जमीनी हकीकत बना दिया।
वेस्ट बंगाल के मुर्शिदाबाद में कब्र
आज सिराजुद्दौला की कब्र पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के खुशबाग में स्थित है। यह स्थान भारतीयों को उस दौर की याद दिलाता है, जब सत्ता की भूख और विश्वासघात ने पूरे उपमहाद्वीप को गुलामी की बेड़ियों में जकड़ दिया।
