बरेली/लखनऊ : हज यात्रा 2025 के लिए भारत से हज यात्रियों का जत्था जाना शुरू हो गया है। जून में हज मुकम्मल हो जाएगा। इस बार भी उत्तर प्रदेश, विशेषकर बरेली और लखनऊ जैसे शहरों से हजारों श्रद्धालु पवित्र यात्रा के लिए जा रहे हैं। मगर, करेंसी से जुड़े नियमों को लेकर यात्रियों में भ्रम की स्थिति रहती है। क्योंकि, वहां सऊदी रियाल चलता है। भारतीय करीब 25 रूपये के बदले एक रियाल मिलता है। भारतीय करेंसी के सभी नोट वैध हैं। हालांकि, इसको लेकर हज कमेटी और बैंक अधिकारियों ने यात्रियों को पहले ही जानकारी देनी शुरू कर दी है।
हज 2025 में कौन-कौन से भारतीय नोट साथ ले जा सकते हैं यात्री?
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार हज यात्री 500, 200, 100, 50, 20 और 10 रुपये के नोट अपने साथ ले जा सकते हैं। भारतीय करेंसी के 2000 रुपये के नोट को 8 नवंबर,2016 को ही बंद किया जा चुका है, जो अब चलन से बाहर हो चुके हैं। यह नोट सऊदी अरब ले जाना प्रतिबंधित है।
ऐसे होती है करेंसी चेंज
हज यात्री सऊदी अरब पहुंचने पर एयरपोर्ट या अधिकृत करेंसी एक्सचेंज काउंटर से इन नोटों को सऊदी रियाल में बदल सकते हैं। सऊदी अरब के मदीने शरीफ में गेट नंबर 64 के पास सबसे बेहतर करेंसी चेंज होती है। यहां भारतीय रूपये की सही कीमत मिलती है। कुछ मनमानी भी करते हैं।
कभी चलते थे ‘हज नोट’, अब बन गए हैं इतिहास
भारतीय हज यात्रा का एक ऐतिहासिक पहलू ‘हज नोट’ हुआ करता था। ये विशेष नोट केवल हज यात्रियों को दिए जाते थे और इनके रंग, डिजाइन और चिन्ह सामान्य नोटों से अलग होते थे। पहली बार 1959 में जारी किए गए थे। यह दो रंगों में होते थे। 10 रुपये का नीला नोट और 100 रुपये का लाल नोट होता था। इन पर हिंदी और अंग्रेजी में ‘हज’ लिखा होता था। ये विशेष नोट हज यात्री को समुद्री जहाज या विमान में चढ़ने से पहले दिए जाते थे। 1970 के दशक के मध्य तक इनका उपयोग हुआ, लेकिन अब यह परंपरा समाप्त हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक हज यात्री
हर साल की तरह 2025 में भी सबसे ज्यादा हज यात्री उत्तर प्रदेश से जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 13,000 यात्री यूपी से हज यात्रा पर जा सकते हैं। बिहार, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से भी सैकड़ों यात्री शामिल हैं। बरेली, मुरादाबाद, आजमगढ़, कानपुर और लखनऊ से बड़ी संख्या में लोग रवाना होंगे।
हज यात्रा की लागत और सब्सिडी का समापन
सरकार द्वारा हज सब्सिडी पूर्ण रूप से समाप्त कर दिए जाने के बाद, अब प्रत्येक हज यात्री को औसतन 3.50 लाख रुपये से सात लाख रूपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। पहले की तरह इस बार भी हज यात्रियों को सऊदी रियाल अग्रिम रूप से नहीं दिए जा रहे हैं। करीब 60 हज सेवक यात्रियों की सहायता के लिए साथ जाएंगे।
हज यात्रियों को करेंसी एक्सचेंज की जानकारी दी गई
हज कमेटी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में एसबीआई की टीम द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि यात्री कौन-कौन से नोट साथ ले जा सकते हैं और कैसे उन्हें रियाल में बदला जा सकता है।
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