लखनऊ : पिछले कुछ समय से गूगल मैप की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। नेविगेशन के लिए सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले गूगल मैप से जुड़ी हालिया घटनाओं ने देशभर के यात्रियों को झकझोर दिया है। कभी जिस तकनीक पर आंख मूंदकर भरोसा किया जाता था। अब वही तकनीक लोगों की जान जोखिम में डाल रही है। बरेली, कर्नाटक, पीलीभीत और हाथरस जैसी जगहों से सामने आई घटनाएं इस बात की गवाही देती हैं कि डिजिटल युग की ये सुविधाएं अगर जिम्मेदारी से न चलाई जाएं तो घातक बन सकती हैं।
बरेली में अधूरे पुल से नीचे गिरी कार, तीन दोस्तों की मौत

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के फरीदपुर थाना क्षेत्र के खल्लपुर गांव के पास 24 नवंबर की रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। एक कार नवनिर्मित लेकिन अधूरे पुल से नीचे गिर गई। जिससे उसमें सवार तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में अजीत, नितिन और अमित शामिल थे। इसमें दो सगे भाई थे। बताया जाता है कि हादसा गूगल मैप की ग़लत दिशा और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही के कारण हुआ। पुल पर कोई बैरिकेडिंग, साइनबोर्ड या चेतावनी चिन्ह नहीं लगे थे। हादसे के बाद बदायूं जिले की दातागंज कोतवाली में गूगल के क्षेत्रीय प्रबंधक समेत लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
बिहार से गोवा जा रहा परिवार जंगल में फंसा, रातभर रहा बिना मदद के
एक और मामला कर्नाटक के बेलगावी जिले से आया था। वहां बिहार का एक परिवार गूगल मैप के जरिए गोवा जा रहा था। गूगल ने उन्हें शिरोली और हेम्मडागा के बीच एक छोटा लेकिन असुरक्षित रास्ता दिखाया, जो सीधे घने जंगल में जा निकला। परिवार लगभग 7-8 किलोमीटर जंगल में अंदर चला गया और रातभर वहीं फंसा रहा। नेटवर्क न होने के कारण किसी को मदद के लिए कॉल भी नहीं किया जा सका। अगली सुबह स्थानीय प्रशासन की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया।
पीलीभीत और हाथरस में भी ऐसे ही हादसे
पीलीभीत के बड़कापुर गांव में कलापुर नहर के पास एक कार सड़क कटाव की वजह से पलट गई। राहत की बात यह रही कि सभी यात्री सुरक्षित रहे। वहीं, हाथरस जिले में बरेली-मथुरा रोड पर गूगल मैप के निर्देश पर आधा दर्जन से अधिक वाहन अधूरे रास्ते में फंसकर हादसे का शिकार हो चुके हैं। इन सभी घटनाओं में एक समान बात यही रही कि वाहन चालक गूगल मैप पर पूरी तरह निर्भर थे और स्थानीय चेतावनियों की कमी ने खतरे को और बढ़ा दिया।
एफआईआर दर्ज, गूगल ने मांगी थी माफी, लेकिन क्या ये काफी ?
बरेली हादसे के बाद दर्ज की गई एफआईआर में गूगल के क्षेत्रीय प्रबंधक समेत लोक निर्माण विभाग के कई अधिकारियों को नामजद किया गया था। गूगल के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा था कि “हम मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर जांच में सहयोग कर रहे हैं।” हालांकि, पीड़ित परिवारों के लिए यह माफ़ी शायद ही संतोषजनक हो। क्योंकि उन्होंने अपने अपनों को खो दिया है।
गूगल मैप से जुड़ी ग़लतियों की ऐसे करें शिकायत
यदि आपको गूगल मैप पर कोई ग़लत निर्देश, अधूरी सड़क, बंद रास्ता या खतरनाक मोड़ दिखे, तो आप इसकी रिपोर्ट करके दूसरों की जान बचा सकते हैं। इसके लिए Google Maps खोलें। इसके बाद निर्देशों में “From” और “To” स्थान भरें। बाईं ओर दिए गए रास्तों में से संबंधित विकल्प चुनें। नीचे “Send Feedback” या “सुझाव दें या शिकायत करें” विकल्प पर क्लिक करें। समस्या का प्रकार चुनें और Submit करें। इस प्रक्रिया से गूगल अपनी मैपिंग में सुधार करता है और यह सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है कि हम सभी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें।
अब भरोसा कम, सतर्कता ज़रूरी
टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी को आसान बनाती है, लेकिन उस पर आँख मूंदकर भरोसा जानलेवा हो सकता है। गूगल मैप जैसे नेविगेशन ऐप्स का उपयोग करते समय यात्रियों को चाहिए कि वे स्थानीय संकेतों, साइनबोर्ड और अपने विवेक का भी प्रयोग करें। अगर कोई रास्ता संदिग्ध या सुनसान लगे, तो लौट जाना बेहतर है बजाय आगे बढ़ने के।
