चार साल पहले रामपुर की युवती का शाही थाना क्षेत्र के गांव में हुआ था विवाह, दहेज में दो लाख रूपये की मांग पूरी न होने पर ली जान
बरेली : यूपी के बरेली में दहेज में दो लाख रूपये की नकदी न मिलने पर महिला की जान लेने वाले आरोपी पति को न्यायालय (कोर्ट) ने सात साल की सजा और सात हजार रूपये का अर्थदंड लगाया है। रामपुर जिले के खजुरिया खुर्द गांव निवासी टीकाराम ने अपनी पुत्री मिलेश का विवाह बरेली देहात के शाही थाना क्षेत्र के रास गांव निवासी हरद्वारी के साथ किया था। मगर, विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने 2 लाख रुपये के दहेज की मांग की। आरोप है कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। पिता टीकाराम ने बताया कि 19 नवंबर, 2021 को बेटी का फोन आया कि ससुराल दहेज के लिए मारपीट रहे हैं। इसके बाद पहुंचे, तो बेटी मृत थी। शव पर चोटों के निशान देख उन्होंने हत्या की आशंका जताई और थाना शाही में रिपोर्ट दर्ज कराई।
दहेज हत्या में दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस ने पीड़िता पिता की ओर से अपराध संख्या 270/2021 को धारा 498A / 304B भा.दं.वि. और 3/4 दहेज निषेध अधिनियम के तहत दर्ज किया। मामले की सुनवाई न्यायालय एडीजे–08 कोर्ट में हुई। मजबूत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर आरोपी हरद्वारी को धारा 304B भारतीय दंड संहिता में 7 वर्ष का कठोर कारावास, धारा 498A भा.दं.स.में 2 वर्ष का कारावास व और 5,000 का जुर्माना और धारा 4 दहेज निषेध अधिनियम में 1 वर्ष का कारावास व 2,000 का जुर्माना लगाया है।
आर्थिक दंड अदा न करने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा

कोर्ट ने आरोपी पर सात हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि पीड़ित परिवार को देनी होगी। मगर, आरोपी को यह राशि नहीं देता है , तो उसे अतिरिक्त 2 माह का कारावास भुगतना होगा। इस सजा को दिलाने में एसपी सिटी एवं ऑपरेशन कन्विक्शन के नोडल अधिकारी मानुष पारीक, एडीजीसी (न्यायालय एडीजे–08) दिनेश पटेल, तत्कालीन सीओ मीरगंज राजकुमार मिश्र, दुर्गेश कुमार, और पेशकर शाहनवाज खान की मुख्य भूमिका रही थी।
