“इस्लामी अखलाक, किरदार और खानकाही रस्में ही हैं नफरत मिटाने का रास्ता”
बरेली शरीफ : दरगाह-ए-आला हज़रत पर दो दिवसीय उर्से ताजुश्शरीआ का आगाज हो गया। नबीरा-ए-आलाहज़रत अल्लामा तौसीफ रज़ा खान की सरपरस्ती में उर्स शुरू हुआ। इस मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में मजहबी रहनुमा, खानदाने आलाहज़रत के उलमा और बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत की कार्यक्रम की शुरुआत में जामिया आलाहज़रत के प्रिंसिपल और शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम रजवी साहब ने संचालन कर शिक्षा और इस्लामी ज्ञान की अहमियत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि खानदाने आलाहज़रत की पहचान इल्म व अमल से है, और यही रास्ता ताजुश्शरीआ की भी जिंदगी का उसूल रहा। जामिआ आलाहज़रत के डायरेक्टर, मुफ्ती फैज़ रज़ा अज़हरी ने ताजुश्शरीआ की खिदमात को याद करते हुए कहा कि हजरत रेहाने मिल्लत और ताजुश्शरीआ ने आलाहज़रत और मुफ्ती-ए-आज़म के पैगाम को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए जो मेहनत की। वह हमारे लिए एक रूहानी मॉडल है। उन्होंने खानदाने आलाहज़रत से अपील की कि वे अपने से जुड़े गैर खानदानी सेवकों और रिश्तेदारों पर नज़र रखें, और मरकज के नाम से कोई गैर शरई या गैर कानूनी गतिविधि न होने दें। उप डायरेक्टर हजरत सैयद आमिर मियां ने कहा कि मुल्क और इंसानियत की भलाई के कामों में सबको आगे बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने देश हित और सामाजिक एकता को मजहबी ज़िम्मेदारी बताया।
देश में फैलती नफरत पर जताई चिंता

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अल्लामा तौसीफ रज़ा खान साहब ने अपने विशेष खिताब में देश में फैल रही नफरत, सांप्रदायिक तनाव और साजिशों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि लोग धर्म के नाम पर एक-दूसरे से लड़ते रहें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “आप सब आलाहज़रत के मानने वाले हैं, मुफ़्ती-ए-आज़म के चाहने वाले हैं, और सच्चे देशप्रेमी हैं। आपको अपने आला इस्लामी अखलाक व किरदार और खानकाही रस्मों से नफरत को मोहब्बत में बदलना है। यही उर्से ताजुश्शरीआ का पैगाम है और यही दरगाहे आलाहज़रत की तालीम भी।” कार्यक्रम के अंत में मुफ्ती इरशाद मंजरी साहब, मुफ्ती नवाज़िश रजवी साहब और कारी सरताज साहब ने शजरा व कुल शरीफ की तिलावत की और मुल्क में अमन, भाईचारे और सलामती की दुआ हज़रत तौसीफे मिल्लत साहब ने की।
