बुलंदशहर के सुनहेरा गांव में जातीय तनाव की चिंगारी
बरेली/बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक बेहद दर्दनाक और भयावह घटना सामने आई है। इससे पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। बुलंदशहर की कोतवाली देहात के सुनहेरा गांव में तेज रफ्तार गाड़ी का विरोध करना दलित समुदाय के लोगों को इतना भारी पड़ा कि एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
गाली-गलौज और फिर कुचलने की वारदात
गांव के भूपेंद्र ने बताया कि सोमवार रात गांव के रास्ते से तेज रफ्तार थार और अन्य गाड़ियाँ गुजर रही थीं। स्थानीय बुजुर्ग और महिलाएं जब इन युवकों से रफ्तार कम करने की अपील करने लगीं, तो विवाद बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवकों ने न सिर्फ बदसलूकी की, बल्कि जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया और धमकाते हुए बोले – “औकात में रहो।”
कुछ देर बाद वापस लौटे आरोपी
बताया जाता है कि आरोपी कुछ देर बाद वही गाड़ियाँ दोबारा लेकर लौटे, और सड़क किनारे खड़े लोगों पर थार चढ़ा दी। 60 वर्षीय शीला देवी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुनीता,क्रांति और प्रेमचंद गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
एफआईआर और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना के बाद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज की है। मुख्य आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे पकड़ने के लिए टीमें लगाई गई हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
जानें क्या बोली पुलिस
“हम मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। यह बेहद संवेदनशील मामला है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी समुदाय को डरने की जरूरत नहीं है।”
जातीय नफरत की साजिश?
गांव में दलित समुदाय के लोगों का आरोप है कि यह हमला सिर्फ एक सड़क विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जातीय उत्पीड़न का हिस्सा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें पहले भी धमकाया गया था और अब इस हमले के जरिए उन्हें चुप कराने की कोशिश की गई है।
