बरेली : हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इस पुरानी लेकिन प्रबंधनीय बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है। अस्थमा को लेकर समाज में कई भ्रांतियाँ और डर हैं, लेकिन शहर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.मुहम्मद नदीम कहते हैं सच यह है कि सही जानकारी, उपचार और जीवनशैली में सुधार के जरिए इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इस खास मौके पर हम रिया की प्रेरक कहानी के ज़रिए यह समझने की कोशिश करेंगे कि अस्थमा क्या है, यह किसे हो सकता है, और इससे किस तरह जीवन को बेहतर तरीके से जिया जा सकता है।
जानें क्या है अस्थमा

डॉ.मुहम्मद नदीम बताते हैं कि अस्थमा एक श्वसन संबंधी रोग है। इसमें फेफड़ों की वायुमार्ग (एयरवेज) में सूजन आ जाती है और वे संकुचित हो जाती हैं। इस कारण व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, खांसी, छाती में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं होती हैं। यह बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी प्रभावित कर सकती है। शहरी प्रदूषण, धूल, धुआं, एलर्जी, सर्दी-खांसी और वंशानुगत कारणों से यह और भी गंभीर रूप ले सकती है। अच्छी बात यह है कि यह रोग लाइलाज नहीं है। इसको दवाइयों, इनहेलर और सतर्क जीवनशैली से नियंत्रित किया जा सकता है।
रिया की कहानी: एक नन्ही योद्धा और उसकी सांसों की लड़ाई
9 साल की रिया, जो बाकी बच्चों की तरह दौड़ना, खेलना और मस्ती करना चाहती थी। लेकिन उसे अक्सर सांस लेने में परेशानी होती थी। छाती से घरघराहट की आवाज आती और वह थककर बैठ जाती। जब डॉक्टरों ने जांच की, तो पता चला कि रिया को अस्थमा है। उसके माता-पिता घबरा गए, लेकिन डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि घबराने की जरूरत नहीं। बस सतर्क रहने और नियमित इलाज की जरूरत है। रिया को इनहेलर दिया गया, और समझाया गया कि यह अब उसकी सबसे जरूरी मदद होगी। रिया ने साहस नहीं खोया। उसने डॉक्टर की हर बात मानी, नियमित दवा ली, इनहेलर का सही इस्तेमाल सीखा और उन चीजों से दूरी बना ली जो उसके अस्थमा को बढ़ा सकती थीं, जैसे धूल, तेज परफ्यूम, धुआं और ठंडी हवा। उसने योग और हल्के व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल किया। धीरे-धीरे उसकी हालत बेहतर होती गई। आज रिया स्कूल जाती है। दोस्तों के साथ खेलती है और एक सामान्य जीवन जी रही है, एक मिसाल बनकर।
अस्थमा कोई छूत की बीमारी
फिजिशियन डॉ.मुहम्मद नदीम कहते हैं कि यह कोई छूत की बीमारी नहीं है। यह दुनिया भर में लगभग 30 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित करता है। यह विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाता है। बच्चों में अस्थमा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। WHO के मुताबिक अस्थमा से जुड़ी मौतें रोकी जा सकती हैं, यदि समय पर इलाज और देखभाल हो। इनहेलर का नियमित उपयोग करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें। ट्रिगर्स को पहचानें और उनसे दूरी बनाएं, जैसे धूल, धुआं, परफ्यूम, सर्दी आदि। योग और प्राणायाम जैसी तकनीकों को अपनाएं, जो फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। स्वस्थ खानपान और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है। भावनात्मक सहयोग पाना भी महत्वपूर्ण है। परिवार और दोस्तों का साथ रोगी को मानसिक मजबूती देता है। इस दिवस का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि यह बताना है कि अस्थमा एक चुनौती ज़रूर है, लेकिन जीवन की रुकावट नहीं। सही समय पर निदान, समर्पण, और समझदारी से इससे न केवल निपटा जा सकता है, बल्कि सामान्य और सक्रिय जीवन भी जिया जा सकता है।
