बागपत: ज़िले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। गांगनोली गांव की एक मस्जिद में मौलाना की पत्नी और उनकी दो मासूम बेटियों की हत्या उन्हीं दो छात्रों ने कर दी, जो उनसे तालीम लेने आते थे। शनिवार की सुबह करीब नौ बजे मौलाना इब्राहिम ने पढ़ाई के दौरान दोनों छात्रों को गलती करने पर डांटा और उनकी पिटाई कर दी थी। इसके बाद वह अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के स्वागत के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देवबंद चले गए। दोपहर करीब एक बजे दोनों छात्र गुस्से से भरे मस्जिद में पहुंचे। मस्जिद के ऊपर वाले कमरे में मौलाना की पत्नी इसराना और दोनों बेटियां सोफिया और सुमैय्या सो रही थीं। दोनों छात्रों ने पहले हथौड़े से हमला किया और फिर चाकू से गला रेतकर तीनों की बेरहमी से हत्या कर दी। वारदात के बाद वे दोनों भाग निकले।
करीब दो घंटे बाद दोपहर दो बजे जब नमाज के लिए लोग मस्जिद में आए, तो उन्होंने मौलाना को पुकारा, पर कोई जवाब नहीं मिला। जब ऊपर गए तो कमरे से खून बहता हुआ दिखा। दरवाजा खोलते ही सबके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। सामने मौलाना की पत्नी और दोनों बेटियों की लाशें खून से लथपथ पड़ी थीं। इस दृश्य को देखकर लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। पूरे गांव में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते सैकड़ों लोग मस्जिद में जुट गए। पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरू में पुलिस का शक मौलाना इब्राहिम पर ही गया, क्योंकि उस वक्त मस्जिद में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद थे और वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन जब उन्होंने पूरा घटनाक्रम बताया तो उन्हें छोड़ दिया गया।
पुलिस ने जांच शुरू की और मस्जिद के बाहर लगे कैमरों की फुटेज खंगाली। उसी में दो छात्रों की हरकतें रिकॉर्ड मिल गईं। फुटेज में दोनों आरोपी दोपहर 12:30 बजे मस्जिद में दाखिल होते नजर आए। पुलिस ने तुरंत दोनों नाबालिग छात्रों को हिरासत में लिया। शुरुआत में उन्होंने इनकार किया, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो वे टूट गए और अपना गुनाह कबूल कर लिया। दोनों की उम्र महज 14 और 15 साल है। उन्होंने बताया कि मौलवी साहब अक्सर सबके सामने डांटते और मारते थे, जिससे उनकी बेइज्जती होती थी। इसलिए उन्होंने बदला लेने की ठान ली थी।
आरोपियों ने बताया कि हत्या के बाद वे मस्जिद से कुछ ही दूरी पर अपने घर चले गए और फिर कुछ देर बाद वापस आकर भीड़ में शामिल हो गए। वे रोने और शोर मचाने लगे ताकि किसी को शक न हो। पुलिस ने बताया कि वारदात में लूट या किसी अन्य मकसद का कोई एंगल नहीं मिला। यह हत्या पूरी तरह से बदले की भावना से की गई थी। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के दौरान गांव में तनाव फैल गया। लोगों ने शव भेजने का विरोध किया और पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। डीआईजी और अन्य अफसरों ने समझा-बुझाकर हालात संभाले।
