पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर, अमेरिका–इस्राइल का ईरान पर संयुक्त हमला
दिल्ली : पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान पर व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। ईरान की राजधानी तेहरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी धमाके की खबर है। इस्राइली वायुसेना ने एक साथ कई ईरानी शहरों पर बमबारी की, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। इसके जवाब में ईरान ने पलटवार करते हुए पांच देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
‘शासन बदलना मकसद नहीं’, इस्राइली सेना का बयान
हमलों के बाद एक प्रेस ब्रीफिंग में इस्राइली सैन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अभियान पूरी तरह सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित है। अधिकारी के अनुसार इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान से उत्पन्न सुरक्षा खतरों को कम करना है, न कि किसी देश की राजनीतिक व्यवस्था को बदलना। इस बयान के साथ ही क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है क्या यह सीमित सैन्य ऑपरेशन रहेगा या व्यापक संघर्ष में बदलेगा। इस्राइल का कहना है कि उसके निशाने पर केवल सैन्य ठिकाने, हथियार डिपो और कमांड-सेंटर हैं, जबकि नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है।
इस्राइल में 70 हजार रिजर्व सैनिक तैनात, हाई अलर्ट
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस्राइली सेना ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। सेना ने आने वाले घंटों और दिनों में करीब 70 हजार रिजर्व सैनिकों को बुलाने का फैसला किया है। इन सैनिकों की तैनाती मुख्य रूप से हवाई सुरक्षा को मजबूत करने, होम फ्रंट कमांड और सीमाओं की रक्षा के लिए की जा रही है। इस्राइल में सायरन, आपात निर्देश और नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
ईरान की दो टूक चेतावनी, ‘ऐतिहासिक सबक सिखाएंगे’
ईरानी सेना ने अमेरिका और इस्राइल को कड़ी चेतावनी दी है। सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफजल शेखारची ने कहा कि ईरानी शहरों पर हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई में कोई हिचक नहीं दिखाई जाएगी। उनके मुताबिक क्षेत्र में इस्राइल की मदद करने वाला कोई भी सैन्य ठिकाना ईरान की सेना के निशाने पर होगा। ईरान ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका को जवाब देने की रणनीति में पड़ोसी देशों की परवाह नहीं की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकाने संभावित खतरे के दायरे में आ सकते हैं। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता और सतर्कता बढ़ गई है।

स्कूल पर हमले का दावा, अमेरिकी ठिकानों पर IRGC की कार्रवाई
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत के मिनाब शहर में एक प्राथमिक बालिका विद्यालय पर इस्राइली हमले का दावा किया गया है, जिसमें कम से कम पांच छात्राओं की मौत बताई गई है। इस्राइल की ओर से इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उधर ईरान की अर्ध-सरकारी Fars News Agency के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। रिपोर्ट में अल-उदीद एयर बेस, अल-सलेम एयर बेस, अल-धफरा एयर बेस और बहरीन में तैनात अमेरिकी पांचवें बेड़े को निशाना बनाने का दावा किया गया है। नुकसान और हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन पूरे क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है।
परमाणु मुद्दे पर ब्रिटेन का रुख, नागरिकों के लिए एडवाइजरी
इन घटनाक्रमों के बीच ब्रिटेन ने दोहराया है कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। लंदन का कहना है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कूटनीतिक और बातचीत आधारित समाधान का समर्थक रहा है, लेकिन मौजूदा सैन्य हालात ने सुरक्षा चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं।
अमेरिका–इस्राइल–ईरान के बीच तेज़ होती सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे मध्य-पूर्व को अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह टकराव सीमित दायरे में रहेगा या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शक्ल ले लेगा।
