मुफ्ती-ए-आज़म हिंद की याद में होगा एक रोज़ा उर्स, कुल शरीफ की रस्म रात 1:40 बजे, जायरीन की सुविधाओं को लेकर दरगाह में अहम बैठक
बरेली : दरगाह आला हज़रत में 29 जून, 2026 (सोमवार) को मुफ्ती-ए-आज़म हिंद का 45वां एक रोज़ा उर्स-ए-नूरी अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उर्स को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के बरेली पहुंचने की संभावना को देखते हुए दरगाह प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में दरगाह परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें उर्स के सफल आयोजन और जायरीन की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुफ्ती -ए-आज़म हिंद को इस्लामी जगत में इल्म, तकवा और रहनुमाई की एक महान शख्सियत के रूप में याद किया जाता है। हर वर्ष उनके उर्स में हजारों अकीदतमंद शामिल होते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है।
कुरानख्वानी से उर्स का आगाज
दरगाह प्रशासन व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है। दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स-ए-नूरी का आगाज़ 29 जून की सुबह नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद कुरानख्वानी से होगा। इसके बाद दिनभर नात -ओ- मनकबत का सिलसिला जारी रहेगा। उलेमा-ए-किराम मुफ्ती-ए-आज़म हिंद की जिंदगी, उनके इल्मी ख़िदमात और समाज के लिए उनकी सेवाओं पर प्रकाश डालेंगे।कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को भी उनकी शिक्षाओं और विरासत से रूबरू कराना है।
उलमा मुफ्ती-ए-आजम हिंद की जिंदगी पर डालेंगे रोशनी
उर्स के दौरान दिनभर चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों के बाद मुख्य आयोजन रात में होगा। नमाज़-ए-ईशा के बाद रात लगभग 10 बजे मुख्य कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें देशभर से आए उलेमा अपने विचार रखेंगे और मुफ्ती-ए-आज़म हिंद की धार्मिक एवं सामाजिक सेवाओं को याद करेंगे। इस दौरान दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहेंगे। उर्स की सबसे अहम रस्मों में शामिल ‘कुल शरीफ’ की रस्म देर रात 1 बजकर 40 मिनट पर अदा की जाएगी।
सज्जादानशीन मुल्क के अमन को करेंगे दुआएं
इसके बाद दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी विशेष दुआ कराएंगे, जिसमें मुल्क की तरक्की, अमन-चैन और इंसानियत की भलाई के लिए दुआएं की जाएंगी। उर्स की तैयारियों को लेकर दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान की सरपरस्ती में आयोजित बैठक की अध्यक्षता मुफ्ती अहसन मियां ने की, जबकि व्यवस्थाओं की निगरानी सय्यद आसिफ मियां द्वारा की जा रही है। बैठक में उर्स-ए-नूरी के साथ आगामी उर्स-ए-रज़वी की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।
देशभर से जुटेंगे अकीदतमंद
बैठक में सबसे अधिक जोर देशभर से आने वाले जायरीनों की सुविधाओं पर दिया गया। उनके ठहरने, लंगर, सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गईं। दरगाह प्रशासन का कहना है कि सभी जायरीनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है, ताकि वे पूरी श्रद्धा और सुकून के साथ उर्स में शामिल हो सकें। इस अवसर पर मुफ्ती अकिल रज़वी, मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी, राशिद अली खान सहित टीटीएस और दरगाह से जुड़े कई जिम्मेदार सदस्य मौजूद रहे। सभी ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सहयोग का भरोसा दिलाया। दरगाह प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार भी उर्स-ए-नूरी में देशभर से बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होंगे। तैयारियां अंतिम चरण में हैं और बरेली एक बार फिर धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल के बीच मेहमाननवाजी के लिए तैयार नजर आ रहा है।
