पीलीभीत की कल्पना रावत को मिली 76वीं रैंक
तिलहर के मजदूर पुत्र शकील अहमद ने पाई 506वीं रैंक, 1009 अभ्यर्थी चयनित, महिलाओं ने मारी बाजी
नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 का बहुप्रतीक्षित परिणाम आज घोषित कर दिया गया है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश की बेटी, प्रयागराज की शक्ति दुबे ने देश भर में पहला स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता ने न केवल यूपी को गर्वित किया है, बल्कि पूरे देश में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल भी कायम की है। इस परीक्षा में 1009 अभ्यर्थी सफल हुए हैं।
हौसले बुलंद हो, तो सच होते हैं सपने
बरेली मंडल के शाहजहांपुर जिले के तिलहर कस्बा के इमली मोहल्ले निवासी शकील अहमद की है। जिनके पिता कभी अपने बच्चों को पालने के लिए मजदूरी करते थे। आज बेटे ने आईपीएस बनकर बुलंदी के शिखर को छुआ है। शकील ने यूपीएससी में 506 रैंक हासिल की है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा 2024 का अंतिम परिणाम घोषित किया तो शकील के परिवार में जश्न का माहौल हो गया।हाजी तसब्बर हुसैन के छह बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ा परिवार होने के चलते तसब्बर कभी पोटरगंज मंडी में पल्लेदारी किया करते थे। धीरे-धीरे बेटे बड़े हुए और परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। परिवार बैटरी का कारोबार करता है।
कल्पना ने हासिल की 76वीं रैंक, पति भी आईएएस

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद पीलीभीत के बीसलपुर के मोहल्ला पटेल नगर निवासी कल्पना रावत के घर जश्न का माहौल हो गया।उन्होंने ऑल इंडिया 76वीं रैंक हासिल की है। कल्पना रावत मूल रूप से हरियाणा के जिला सोनीपत के गांव जाजल की रहने वाली हैं। कल्पना का विवाह छह दिसंबर 2024 को सूर्य प्रताप सिंह के साथ हुआ था। सूर्य प्रताप सिंह वर्तमान में बिहार के जिला रोहतास सासाराम की तहसील डेहरी ऑन सोन में बतौर एसडीएम तैनात हैं। सूर्य प्रताप वर्ष 2021 के आईएएस अधिकारी हैं। कल्पना ने अपने पति के साथ रहकर आईएएस की तैयारी की थी। पढ़ाई में सूर्य प्रताप सिंह ने अपनी पत्नी का काफी सहयोग किया। उन्होंने आईएएस की परीक्षा वर्ष 2024 में दी थी। मार्च 2025 में उनका साक्षात्कार हुआ था।
टॉप 5 रैंक धारकों की सूची

1. शक्ति दुबे – उत्तर प्रदेश
2. हर्षिता गोयल – गुजरात
3. डोंगरे अर्चित पराग – तमिलनाडु
4. शाह मारगी चिराग – गुजरात
5. आकाश गर्ग – उत्तर प्रदेश
महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी
इस वर्ष की परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। टॉप 5 में तीन महिलाएं शामिल हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि अब सिविल सेवा में महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आ रही हैं। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाएगा, बल्कि समाज में लैंगिक समानता और अवसरों की बराबरी को भी बढ़ावा देगा। “महिलाओं का यह प्रदर्शन समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत है और शक्ति दुबे जैसी प्रतिभाओं से देश को नई दिशा मिलेगी।”
शक्ति दुबे: सफलता की मिसाल

तीसरे प्रयास में देश की टॉपर बनने वाली शक्ति दुबे ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष और धैर्य से कोई भी मंज़िल पाई जा सकती है। पिछले वर्ष मात्र 2 अंकों से चयन से वंचित होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रयागराज में रहकर लगातार अध्ययन किया और इस बार देश की नंबर 1 रैंक हासिल की। शक्ति की इस सफलता ने यूपी के युवाओं को नई प्रेरणा और आत्मविश्वास दिया है।
