विद्यार्थियों के समर्थन में जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने के बाद हुई थी कार्रवाई
बरेली : विद्यार्थियों और युवाओं के मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर -मंतर पर आयोजित आंदोलन में शामिल होने के बाद निष्कासन की कार्रवाई का सामना कर रहे समाजवादी पार्टी के नेता एवं गन्ना उत्पादक महाविद्यालय, बहेड़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित भारद्वाज को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने 22 जुलाई, 2026 को जारी उनके निष्कासन आदेश को निरस्त कर दिया है। डॉ. मोहित भारद्वाज के अनुसार, वह विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित आंदोलन में शामिल हुए थे। आंदोलन से लौटने के बाद महाविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई कर निष्कासन का आदेश जारी किया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दी चुनौती
इस आदेश को डॉ.मोहित भारद्वाज ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी। डॉ. भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता बिपिन शर्मा और अभिनव मिश्रा ने रिट-ए संख्या 11782/2026, डॉ. मोहित भारद्वाज बनाम स्टेट ऑफ यू.पी. एवं 5 अन्य के माध्यम से याचिका दाखिल की।इस मामले में राज्य सरकार सहित कुल छह पक्षकार बनाए गए थे। इनमें महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति, डीएम बरेली,जिला गन्ना अधिकारी, गन्ना उत्पादक महाविद्यालय बहेड़ी के प्राचार्य तथा प्रबंधक शामिल थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ताओं ने निष्कासन आदेश को चुनौती दी।
एक शिक्षक के नाते विद्यार्थियों की आवाज बनना जरूरी

इसके बाद न्यायालय ने डॉ. भारद्वाज को राहत देते हुए निष्कासन आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय से राहत मिलने के बाद डॉ. मोहित भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने पूरे प्रकरण में न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखा और अपने अधिकारों के लिए केवल कानूनी रास्ता अपनाया। उनका कहना है कि जंतर-मंतर जाना किसी व्यक्तिगत उद्देश्य से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों के समर्थन में था। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक होने के नाते विद्यार्थियों की आवाज के साथ खड़ा होना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। डॉ. भारद्वाज ने संघर्ष के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षक साथियों, मित्रों और शुभचिंतकों के सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
सत्य की बताई जीत
उन्होंने अपने अधिवक्ताओं बिपिन शर्मा और अभिनव मिश्रा का भी विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि दोनों ने पूरी मजबूती से उनका पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए थी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए और वह आगे भी कानून का सम्मान करते हुए विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करेंगे। डॉ. मोहित भारद्वाज ने कहा, “मैंने हमेशा सत्य और न्याय पर विश्वास किया है। कठिन समय जरूर आया, लेकिन मैंने अपना विश्वास नहीं खोया। सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय से मिली राहत उनके परिवार, विद्यार्थियों और उन सभी लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिन्होंने इस पूरे संघर्ष में उनका साथ दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्य की जीत हुई है।
