2024 लोकसभा चुनाव में विरोध करने वालों को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने से खफा बोले- समर्थकों की इच्छा के अनुसार तय करूंगा अगला कदम, बीडीसी से शुरू किया था सियासी सफर
बरेली : उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगना तय हो गया है। बरेली की आंवला लोकसभा सीट से दो बार पूर्व सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी छोड़ने का लगभग ऐलान कर दिया है।एक दिन पहले सोशल मीडिया पर उनकी ओर से शेयर की गई ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर बुधवार को उन्होंने खुद स्थिति स्पष्ट की। धर्मेंद्र कश्यप ने मीडिया से बात कर भाजपा छोड़ने के साथ ही पार्टी के भीतर अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की। उन्होंने अपने बयान में वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जिन लोगों ने उनकी खुलकर खिलाफत की, अगर वही लोग बाद में पार्टी में बड़े पदों पर बैठें तो यह उनके लिए पीड़ादायक है।
चुनाव में विरोध करने वालों को जिम्मेदारी मिलने से खफा

पूर्व सांसद ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जिन लोगों ने उनके खिलाफ खुलकर काम किया, अगर पार्टी ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं करती और उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती हैं, तो उनके जैसे कार्यकर्ताओं के सामने पार्टी को ‘टाटा-बाय-बाय’ कहने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। धर्मेंद्र कश्यप ने हालांकि अपने बयान में किसी नेता का नाम नहीं लिया। लेकिन उनके इस बयान से साफ है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद संगठन में हुए बदलाव और कुछ लोगों को मिली अहम जिम्मेदारियों को लेकर वह नाराज हैं।
समर्थकों की बात सुनकर तय करूंगा अगला कदम
भाजपा छोड़ने का ऐलान करने के बावजूद धर्मेंद्र कश्यप ने फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह पहले अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे और उनकी राय जानेंगे। इसके बाद ही आगे की राजनीतिक राह तय करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि समर्थक जैसा फैसला करेंगे।वह उसी के अनुरूप आगे बढ़ेंगे।यही वजह है कि अब उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर बरेली की सियासत में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सपा में जाने की अटकलें तेज
धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़ने के बाद उनके समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट पर सपाइयों ने स्वागत किया था।हालांकि, उन्होंने अभी तक किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक संभावना और अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है। अगर धर्मेंद्र कश्यप किसी विपक्षी दल का दामन थामते हैं तो बरेली और खासकर आंवला लोकसभा क्षेत्र की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है। उनके समर्थकों की अगली बैठक और उसके बाद होने वाली घोषणा पर अब राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की नजर है। उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में सपा को छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ा था।
घर के बाहर जुटे समर्थक, राजनीतिक माहौल गरम
भाजपा छोड़ने की खबर सामने आने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के आवास के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने की बात सामने आई है। समर्थकों के बीच भी उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चा बनी हुई है। धर्मेंद्र कश्यप की सोशल मीडिया पोस्ट ‘टाटा-बाय-बाय’ से शुरू हुई राजनीतिक हलचल अब भाजपा से उनके इस्तीफे के ऐलान तक पहुंच गई है। ऐसे में यूपी की आगामी चुनावी राजनीति में उनका अगला कदम कितना बड़ा राजनीतिक संदेश देता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि धर्मेंद्र कश्यप अपने समर्थकों की बैठक के बाद किस दल का रुख करते हैं। उनके भाजपा छोड़ने के बाद बरेली की सियासत में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
बीडीसी से शुरू किया सियासी सफर
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने 1995- 96 में क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) से सियासी सफर शुरू किया था। इसके बाद जिला पंचायत सदस्य बने और 2002 में बसपा के टिकट पर सन्हा (बिथरी चैनपुर)विधानसभा से पहली बार विधायक चुने गए थे। कुछ ही समय बाद बसपा की सरकार यूपी में गिर गई। उन्होंने बसपा के कुछ अन्य विधायकों के साथ सपा को समर्थन किया। सपा में शामिल होने के बाद उन्हें दर्जा राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली, तो वहीं 2007 का चुनाव सपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे। सपा संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव उन पर काफी भरोसा करते थे। जिसके चलते उन्हें 2009 में आंवला लोकसभा का चुनाव लड़ाया गया। काफी कड़े मुकाबले के बाद करीब 4800 वोट के करीब पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2012 विधानसभा का चुनाव भी नई परिसीमन के चलते बिथरी चैनपुर विधानसभा में बसपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह हार गए थे।
2014 में भाजपा के टिकट पर बने सांसद
2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा से टिकट की काफी कोशिश की, लेकिन टिकट नहीं मिला। जिसके चलते उन्होंने सपा छोड़ भाजपा में चले गए। वह आंवला सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 2019 में भी उन्होंने आंवला लोकसभा में बड़ी जीत दर्ज की। मगर, 2024 में काफी कम अंतर से चुनाव हार गए थे। इसके लिए उन्होंने पार्टी के ही कुछ लोगों पर हरवाने का आरोप लगाया था और पार्टी में शिकायत की थी। मगर, उनका आरोप है की चुनाव हरवाने वालों पर कार्रवाई के बजाय प्रमुख पदों पर बिठाया जा रहा है जिसके चलते पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं।
