मथुरा/प्रयागराज : यूपी के वृंदावन में।यमुना नदी में 10 अप्रैल को हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन द्वारा लगातार राहत और बचाव कार्य जारी है।
पोंटून पुल के पास पलटी नाव, मची चीख-पुकार
हादसा वृंदावन और मांट के बीचपोंटून पुल के पास हुआ, जब यात्रियों से भरी नाव अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। देखते ही देखते लोग यमुना में गिर पड़े और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।सूचना मिलते ही पुलिस, फायर सर्विस, एंबुलेंस और अन्य राहत टीमें मौके पर पहुंच गईं। रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF, SDRF, बाढ़ PAC और गोताखोरों की टीमें जुटी रहीं और लापता लोगों की तलाश जारी है।
800 मीटर दूर मिला शव, मृतकों की संख्या बढ़ी
सर्च ऑपरेशन के दौरान शनिवार को घटनास्थल से करीब 800 मीटर दूर एक और शव बरामद हुआ। जिसकी पहचान मानिक टंडन के रूप में हुई।इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। सभी शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा जा रहा है।
मानवाधिकार आयोग में शिकायत, गंभीर लापरवाही के आरोप
इस हादसे ने अब कानूनी रूप ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि यह केवल हादसा नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक और संचालन स्तर की लापरवाही का परिणाम है।
शिकायत में उठे बड़े सवाल
हाईकोर्ट अधिवक्त की शिकायत में नाव में क्षमता से अधिक सवारियां (ओवरलोडिंग), लाइफ जैकेट जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव, नाव चालक की लापरवाही और तेज गति, सुरक्षा मानकों की अनदेखी हादसे के बाद राहत-बचाव कार्य में देरी, अधिवक्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
मुआवजा और सख्त कार्रवाई की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। घायलों को बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता मिले। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, और अवैध नाव संचालन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
बचाव कार्य जारी, जवाबदेही तय करने की मांग तेज
एक ओर प्रशासन लापता लोगों की तलाश में जुटा है, वहीं दूसरी ओर इस हादसे में हुई लापरवाही को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग तेज होती जा रही है।
