पूर्व एसपी के वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद, आयोग ने 19 मई तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट, अनुपालन न होने पर जताई नाराजगी
प्रयागराज/लखनऊ : यूपी के सम्भल जिले में चर्चित कथित फर्जी एनकाउंटर प्रकरण में राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता गजेंद्र सिंह ने The Justice Hindi को बताया कि आयोग ने अपर पुलिस महानिदेशक (ADGP), बरेली जोन को पुनः निर्देश जारी करते हुए मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा है।आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूर्व आदेश के बावजूद अब तक जांच आख्या न मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
जानें क्या है पूरा मामला?
उन्होंने बताया कि यह मामला नवंबर 2024 का है, जब सम्भल के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक केके विश्नोई का एक वीडियो सामने आया था। वायरल वीडियो में वे पुलिस मुठभेड़ में घायल एक आरोपी को कथित रूप से धमकाते दिखाई दिए थे। वीडियो में घायल आरोपी स्ट्रेचर पर लेटा था और कथित तौर पर उसे यह कहते हुए सुना गया, “अगली बार गोली उसके भेजे में लगेगी।” बताया गया कि आरोपी को मंदिर से घंटा चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
हाईकोर्ट अधिवक्ता ने की थी शिकायत
इस मामले में डॉ. गजेंद्र सिंह यादव, अधिवक्ता, हाईकोर्ट इलाहाबाद ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मुठभेड़ प्रथम दृष्टया संदिग्ध/फर्जी प्रतीत होती है। पुलिस अधिकारी का व्यवहार मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
पीड़ित को मुआवजा दिया जाए
निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। जांच के दौरान पीड़ित पर दबाव न बनाया जाए। इस मामले में आयोग ने नाराजगी जताई थी। मानवाधिकार आयोग ने कहा कि 17 दिसंबर 2024 को जांच रिपोर्ट तलब की गई थी, लेकिन अब तक ADGP कार्यालय की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इसे आयोग ने गंभीर लापरवाही माना है। अब आयोग ने निर्देश दिया है कि 19 मई 2026 तक हर हाल में विस्तृत जांच रिपोर्ट दाखिल की जाए। रिपोर्ट न देने के कारणों का लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत किया जाए।
20 मई को होगी अगली सुनवाई
आयोग ने आदेश दिया है कि मामले को 20 मई 2026 को दोपहर 1 बजे अगली कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया जाए। यह प्रकरण अब केवल एक एनकाउंटर विवाद नहीं, बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली की पारदर्शिता मानवाधिकार संरक्षण, और पुलिस जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मामला बन चुका है।

