अयोध्या : उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिला कारागार से दो कैदी फरार हो गए। इस घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। फरार हुए कैदियों की तलाश के लिए कई टीमें गठित कर दी गई हैं और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक फरार कैदियों में अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरि और सुल्तानपुर निवासी शेर अली शामिल हैं। दोनों कैदी हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में जिला जेल में बंद थे। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे कैदियों की गिनती के दौरान यह खुलासा हुआ कि दोनों जेल से फरार हो चुके हैं। इसके बाद जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों कैदी जिला कारागार की तन्हाई बैरक की दीवार तोड़कर फरार हुए। यह तथ्य जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आ गए। डीआईजी जेल मौके पर पहुंचे और जिला कारागार का गहन निरीक्षण किया। साथ ही जेल के सुरक्षा इंतजामों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार फरार कैदी सूरज अग्रहरि शेर अली हत्याकांड और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में भी नामजद बताया जा रहा है, जबकि दूसरे फरार कैदी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जा रही है। इस घटना के बाद से पूरे अयोध्या जिले में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस और जेल विभाग की संयुक्त टीमें गठित कर फरार कैदियों की तलाश तेज कर दी गई है।
इस पूरे मामले को लेकर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जेलर उदय मिश्र का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने मीडिया के सामने तत्काल बयान देने से इनकार करते हुए कहा कि वह पूरी तैयारी के बाद ही इस मामले पर कुछ कहेंगे। उनके इस बयान ने भी कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी जेल पीसी मीणा ने सख्त रुख अपनाया है। इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक यूसी मिश्रा, जेलर जे.के. यादव, डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी, एक हेड जेल वार्डर और तीन जेल वार्डरों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद जेल विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। फिलहाल फरार कैदियों की तलाश जारी है और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद यह बड़ी चूक कैसे हुई।
