6 साल से नहीं लड़ा चुनाव, हट सकती है मान्यता
लखनऊ : यूपी के पूर्व विधायक स्वर्गीय (मरहूम) मुख्तार अंसारी के के बाद भी उनके परिवार को लगातार कानूनी और राजनीतिक मोर्चों पर झटके लगते जा रहे हैं। अब चुनाव आयोग ने मऊ की दो राजनीतिक पार्टियों देशभक्त निर्माण पार्टी और कौमी एकता दल को नोटिस जारी किया है। मऊ के जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा ने मीडिया से पुष्टि की कि दोनों दलों ने 2019 से 2024 तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ा, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A का उल्लंघन माना गया है। आयोग ने 14 जुलाई 2025 तक जवाब मांगा है। यदि पार्टी अध्यक्ष या महासचिव जवाब नहीं देते, तो दोनों दलों की मान्यता रद्द की जा सकती है।
मुख्तार अंसारी ने 2010 में बनाई थी कौमी एकता दल
मुख्तार अंसारी ने अपने राजनीतिक वर्चस्व को मज़बूत करने के लिए 2010 में कौमी एकता दल का गठन किया था। पार्टी का मुख्यालय मऊ के अस्तूपुरा में बना। मुख्तार अध्यक्ष बने और उनके भाई अफजाल अंसारी महासचिव। और पार्टी का चुनाव चिन्ह गिलास था।
जानें राजनीतिक सफर
2012 में पार्टी ने 41 प्रत्याशी उतारे, लेकिन सिर्फ मऊ और मुहम्मदाबाद में ही जीत मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में बलिया और गाजीपुर से लड़ा, पर हार मिली। इसके बाद बसपा में पार्टी का विलय हो गया। उस वक्त समाजवादी पार्टी से गठबंधन की कोशिश की गई थी, लेकिन फेल हो गई थी। इसके बाद अंसारी बंधु बसपा में चले गए, जहां से 2017 में मुख्तार ने मऊ से चुनाव लड़ा और सुभासपा प्रत्याशी महेंद्र राजभर को हराया।
चुनाव आयोग का रुख सख्त, निष्क्रिय दलों पर कार्रवाई शुरू
चुनाव आयोग अब ऐसे रजिस्टर्ड दलों पर शिकंजा कस रहा है, जो सक्रिय राजनीति से बाहर हैं और सिर्फ नाम के लिए रजिस्ट्रेशन बनाए हुए हैं। देशभक्त निर्माण पार्टी और कौमी एकता दल को 14 जुलाई तक जवाब देना होगा, वरना मान्यता खत्म कर दी जाएगी।
