संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन
देश में महंगाई 77 महीनों के सबसे निचले स्तर पर है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हालिया रिपोर्ट ने इस गिरावट को आर्थिक नीतियों के लिए एक ‘विंडो ऑफ अपॉर्च्युनिटी’ बताया है। बैंक ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों में अब भी कटौती नहीं करता, तो यह एक “महंगी भूल” साबित हो सकती है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की कटौती जरूरी है। इसका सीधा फायदा उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों को मिलेगा। बैंक लोन सस्ते होंगे, निवेश बढ़ेगा और आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी।
नई CPI प्रणाली का प्रभाव
SBI के मुताबिक, नई CPI गणना पद्धति में ई-कॉमर्स आइटम्स को अधिक वज़न और खाद्य वस्तुओं को कम वज़न दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में मुद्रास्फीति के आंकड़े स्थिर या नीचे बने रह सकते हैं। जिससे ब्याज दरों में कटौती का और मजबूत आधार तैयार होता है।
RBI की दोहरी जिम्मेदारी
भारतीय रिजर्व बैंक के पास दोहरी जिम्मेदारी है, मूल्य स्थिरता बनाए रखना, और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना। फिलहाल CPI आधारित मुद्रास्फीति दर सिर्फ 2.1% है, जो कि RBI के निर्धारित 4% लक्ष्य से भी काफी नीचे है। ऐसे में बाजार को उम्मीद है कि RBI सकारात्मक निर्णय लेगा, और इस ‘दिवाली बोनस’ का लाभ आम जनता और इंडस्ट्री दोनों को मिलेगा।
क्या होगा फायदा?
लोन की दरें घटेंगी, जिससे EMI बोझ कम होगा। बिजनेस क्रेडिट में तेजी आएगी। जिससे निवेश बढ़ेगा। रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और MSME सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट होगा।
