आधा सिर, आधा मूंछ और पूरा जीनियस, ऐसा था किशोर दा!, जिन्होने गानों में जिंदगी भर दी!
मुहम्मद साजिद
4 अगस्त 1929 को जन्मे किशोर कुमार, सिर्फ एक गायक नहीं थे वो एक संस्थान थे। उन्होंने हिंदी सिनेमा को ना केवल सुपरहिट गाने दिए, बल्कि अपने अंदाज़, अभिनय और बेमिसाल व्यक्तित्व से बॉलीवुड को एक अलग ऊँचाई पर पहुंचाया। किशोर दा का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्म लेने वाले किशोर कुमार का फिल्मी सफर 1946 में शुरू हुआ, लेकिन असली पहचान उन्हें गायकी से मिली। ‘रूप तेरा मस्ताना’, ‘मेरे सपनों की रानी’, ‘पल पल दिल के पास’ जैसे गीतों ने उन्हें अमर बना दिया।
एक्टिंग से निर्देशन, और फिर कैमरा-मैन तक
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https://youtu.be/vN9jalXunlA?si=5ghSqUkbM3g_v7as
किशोर कुमार फिल्म इंडस्ट्री के इकलौते कलाकार थे, जिन्होंने कैमरे के आगे और पीछे हर रोल निभाया। अभिनेता, गायक, संगीतकार, निर्देशक, निर्माता, लेखक, और यहां तक कि लाइटमैन और कैमरा ऑपरेटर भी। वे खुद को “वन मैन शो” मानते थे, और उनकी जिंदगी भी बिल्कुल उसी तरह थी, नाटकीय, मस्तमौला और बेमिसाल।
जब नहीं मिली पूरी फीस, तो आधा सिर और आधी मूंछ मुंडवा ली!
किशोर कुमार का सबसे चर्चित किस्सा तब का है, जब उन्हें एक फिल्म के लिए आधी फीस मिली। जवाब में, उन्होंने आधा सिर और आधी मूंछ मुंडवा कर शूटिंग पर हाज़िर हो गए। कहा-“आधा पैसा मिला है, तो आधा गेटअप ही मिलेगा!”
13 अक्टूबर 1987,जब सन्नाटा छा गया
किशोर कुमार का अंतिम गीत ‘गुरु-गुरु’ था। जिसे उन्होंने मृत्यु से एक दिन पहले रिकॉर्ड किया था। 13 अक्टूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ने से वे दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन किशोर दा कभी नहीं मरे, वो हर सुर में, हर दिल में ज़िंदा हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने मनाया ‘गौरव दिवस’
उनके सम्मान में MP सरकार ने 4 अगस्त को ‘गौरव दिवस’ घोषित किया। खंडवा में स्थित उनका पुश्तैनी घर आज भी लोगों के लिए श्रद्धा स्थल है। यहां प्रशंसक दूध-जलेबी का भोग चढ़ाते हैं।
क्यों हर युग में किशोर दा हैं, सबसे खास?
उन्होंने राजेश खन्ना से लेकर अमिताभ बच्चन तक हर सुपरस्टार को आवाज दी।।उनकी “योडलिंग” शैली भारत में पहली बार लोकप्रिय हुई। चाहे ‘कोई होता जिसको अपना’ जैसा दर्द हो, या ‘एक चतुर नार’ जैसी मस्ती, वो हर मूड के मास्टर थे। आज भी रियलिटी शोज में सबसे ज्यादा गाए जाने वाले गीत किशोर कुमार के होते हैं।
