नई दिल्ली : संयुक्त अरब अमीरात के दुबई एयरशो में भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1A प्रदर्शन के दौरान अचानक क्रैश हो गया। घटना के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के गठन की घोषणा की है।
क्रैश हुआ फाइटर जेट तेजस का सबसे उन्नत संस्करण मार्क-1A था, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने डिजाइन और विकसित किया है। यह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जो 2200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और नौ टन तक हथियार ले जाने में सक्षम है। इसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और आधुनिक एवियोनिक्स लगाए गए हैं। तेजस छोटे और हल्के सुपरसॉनिक फाइटर जेट्स में गिना जाता है, क्योंकि इसे एल्युमिनियम-लिथियम अलॉय, टाइटेनियम और कार्बन फाइबर कॉम्पोजिट से बनाया गया है।
तेजस पर कई अत्याधुनिक हथियार लगाए जा सकते हैं, जिनमें अस्त्र और I-Derby ER जैसी BVR मिसाइलें, R-73, Python-5 और ASRAAM जैसी छोटी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा इसमें 23 मिमी की GSh-23 ट्विन बैरल तोप भी लगाई गई है। तेजस भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान है, हालांकि इसका इंजन फिलहाल विदेश से—अमेरिकी कंपनी GE—से आयात किया जाता है।
भारत में तेजस परियोजना 1983 से चल रही है और कई वर्ष तकनीकी चुनौतियों और वैश्विक प्रतिबंधों में बीते। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास तेजस मार्क-1 की केवल दो स्क्वॉड्रन हैं, जिनमें कुल 38 विमान शामिल हैं। मार्क-1 में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए मार्क-1A संस्करण विकसित किया गया है। 2021 में HAL को तेजस मार्क-1A के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, लेकिन 2024 में पहली डिलीवरी की समयसीमा पार होने के बाद अब 2025 के मध्य तक भी कोई विमान वायुसेना को प्राप्त नहीं हुआ है।
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 62,370 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत वायुसेना को 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमान मिलेंगे। इनमें 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर जेट शामिल हैं। इन विमानों की आपूर्ति 2027-28 से शुरू होकर अगले छह वर्षों में पूरी की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस परियोजना भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।
