नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला को लेकर अहम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति होगी। वहीं मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से शांति, आपसी सम्मान और सहयोग बनाए रखने की अपील की। अदालत ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल थे, ने कहा कि शुक्रवार को नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या जिला प्रशासन को पहले से उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने निर्देश दिया कि यह जानकारी उसी दिन प्रशासन को दी जाए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
पीठ ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पास सिस्टम लागू कर सकता है या कोई अन्य उपयुक्त व्यवस्था कर सकता है, जिससे भीड़ नियंत्रण में रहे और कोई टकराव न हो। दरअसल, हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बसंत पंचमी के दिन पूरे समय भोजशाला में अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति मांगी थी। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ रही है और इसी दिन भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय द्वारा जुमे की नमाज भी अदा की जाती है, जिसके चलते यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने पक्ष रखा, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलीलें पेश कीं। भोजशाला को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है, जिसे हिंदू पक्ष देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद बताता है। 18वीं सदी में अंग्रेजों द्वारा कराई गई खुदाई के दौरान देवी सरस्वती की एक प्रतिमा मिलने का भी दावा किया जाता है, जिसे उस समय लंदन ले जाया गया था और जो आज भी लंदन के संग्रहालय में बताई जाती है।
एएसआई के आदेश के अनुसार पहले से ही हिंदुओं को हर मंगलवार को पूजा और मुसलमानों को हर शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के मद्देनज़र धार जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आठ हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, संवेदनशील इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग, वॉच टावर और पुलिस चौकियों की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत काबू पाया जा सके।
