नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को धमकाने और निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य में बाधा डालने की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से कहा कि वह विभिन्न राज्य सरकारों की तरफ से सहयोग की कमी को गंभीरता से लें। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो पुलिस तैनात करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव पैनल अपने अधिकार क्षेत्र में पुलिस को सीधे शामिल नहीं कर सकता जब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होती। उन्होंने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इस मामले से निपटने में देरी नहीं होनी चाहिए, अन्यथा हालात अराजकता की ओर बढ़ सकते हैं। चुनाव आयोग की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में BLO के आत्महत्या करने की कोई स्थिति नहीं है। उनका कहना था कि BLO को केवल 30-35 वोटरों के छह-सात घरों की गिनती करनी होती है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह कार्य इतना सरल नहीं है जितना दिखता है। BLO को घर-घर जाकर गिनती फॉर्म भरना और उसे अपलोड करना होता है। जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि यह काम केवल डेस्क पर बैठकर करने वाला कार्य नहीं है और इसमें गंभीर मेहनत और जिम्मेदारी शामिल है।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (SRO) नियुक्त किया। इस कदम से एसआईआर प्रक्रिया में निगरानी और नियंत्रण और मजबूत होगा। प्रेसिडेंसी संभाग के लिए रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुमार रवि कांत सिंह, मेदिनीपुर संभाग के लिए गृह मंत्रालय के नीरज कुमार बांसोद, और बर्दवान संभाग के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कृष्ण कुमार निराला को SRO नियुक्त किया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि SRO की नियुक्ति से सभी संभागों में एसआईआर प्रक्रिया की जांच और निगरानी मजबूत होगी। इससे मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता की संभावना कम हो जाएगी।
राज्य में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण 4 नवंबर 2025 को शुरू हुआ था और चुनाव आयोग ने तय किया है कि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत हर मतदाता का डेटा जांचा जाएगा, डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाया जाएगा और नई प्रविष्टियों को जोड़ा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान यह भी स्पष्ट किया कि BLO और अन्य चुनाव अधिकारियों को धमकाने वाले मामलों पर चुनाव आयोग को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। न्यायालय ने चुनाव आयोग से कहा कि वह एसआईआर कार्य में बाधा डालने वाली घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए।
