Sonam Wangchuk Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस, अंतरिम राहत देने से किया इनकार
कपिल सिब्बल ने पसंद के अस्पताल में इलाज की मांग उठाई, केंद्र ने कहा- जरूरत पड़ने पर एम्स में भी किया जा सकता है शिफ्ट
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तंखा ने वांगचुक की ओर से पक्ष रखा, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा अदालत में पेश हुए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, लेकिन कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
पत्नी और सहयोगियों के लिए अलग रेस्ट रूम के निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों के लिए अलग रेस्ट रूम उपलब्ध कराया जाए। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति और आवश्यक पहुंच दी जाए।
कपिल सिब्बल ने पसंद के अस्पताल में इलाज की मांग की
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक स्वतंत्र नागरिक हैं और उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि मेदांता अस्पताल से बातचीत हो चुकी है और वांगचुक वहीं इलाज कराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एम्स के डॉक्टर चाहें तो इलाज प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
सरकार बोली- स्वास्थ्य पर लगातार नजर, एम्स में भी कर सकते हैं शिफ्ट
केंद्र की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि 16 जुलाई के पूर्व आदेश के अनुसार सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से सोनम वांगचुक की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उपवास के कारण उनकी किडनी के कार्य पर असर पड़ा है और उन्हें बिना शुगर वाले इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जा रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें एम्स में भी शिफ्ट किया जा सकता है।
डॉक्टरों ने बताई स्वास्थ्य की स्थिति
एम्स के चिकित्सक डॉ. अक्षय ने अदालत को बताया कि लंबे उपवास के कारण सोनम वांगचुक के शरीर में शुगर और पोटेशियम का स्तर काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विटामिन और अन्य चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है, हालांकि उन्होंने कुछ उपचार लेने से इनकार किया है। डॉक्टरों के अनुसार उनके कई स्वास्थ्य पैरामीटर सीमा रेखा पर हैं और लगातार निगरानी की जरूरत है।
सरकारी डॉक्टरों पर भरोसे को लेकर हुई बहस
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि सरकारी डॉक्टरों पर अविश्वास क्यों जताया जा रहा है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें सरकारी चिकित्सकों पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वांगचुक अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज चाहते हैं। वहीं सरकार ने कहा कि पूरे मामले में अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है और सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
