लखनऊ: कफ सिरप मामले में यूपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव संजय प्रसाद, FSDA सचिव रोशन जैकब और डीजीपी राजीव कृष्ण ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में अब एसआईटी का गठन कर दिया गया है। इस मामले में अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
रोशन जैकब ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और तथ्यहीन खबरों पर जिला पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में हुई कफ सिरप की घटना का यूपी के मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि 20 दिन पहले सोनभद्र में एक ट्रक कफ सिरप पकड़ा गया था, और इसी एविडेंस के आधार पर रांची में भी एक ट्रक की रिकवरी हुई।
रोशन जैकब ने कहा कि कफ सिरप का इस्तेमाल बीमारी के लिए नहीं हो रहा है, बल्कि इसके कलेक्शन और परचेस का कोई ब्योरा नहीं है। स्टॉक होने के बावजूद इसका मेडिकल उपयोग नहीं हो रहा। इसी के चलते जांच का दायरा बड़े व्यापारियों और उनके चैनलों तक बढ़ाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी के 300 रिटेल विक्रेताओं के खिलाफ जांच की गई है, लेकिन प्राथमिक मंशा छोटे रिटेलरों को नहीं, बल्कि बड़े व्यापारियों तक पहुंचना थी।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि कफ सिरप का सामान्य इस्तेमाल कानूनी है, लेकिन यदि इसका इस्तेमाल अन्य तरीकों से किया गया तो यह अपराध होगा। पिछले दो महीने में मामले में कई सबूत मिले हैं। FSDA ने इस संबंध में 28 जिलों में कुल 128 एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें बनारस में 38, जौनपुर में 16, कानपुर में 8, गाजीपुर में 6, लखीमपुर में 4 और लखनऊ में 4 एफआईआर शामिल हैं।
जौनपुर में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कफ सिरप मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच की जा रही है। बच्चों की मौत और अवैध सप्लाई को लेकर सरकार गंभीर है और पूरी प्रक्रिया सरकार की निगरानी में चल रही है। दोषियों पर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि जिन नेताओं और बड़े व्यापारियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी जांच जारी है। दोषी पाए जाने पर कोई भी बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में यूपी सरकार ने कानून व्यवस्था और मानव सुरक्षा दोनों पर फोकस किया है।
