नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सपा नेता आजम खान के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने अब्दुल्ला की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पासपोर्ट से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि जब ट्रायल अपने अंतिम चरण में है, तब हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।
अब्दुल्ला पर आरोप है कि उन्होंने पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और अपने शैक्षिक अभिलेखों में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज कराई, जबकि पासपोर्ट में जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 बताई गई। इस मामले में उनके खिलाफ 2019 में एफआईआर दर्ज हुई थी और बाद में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग तथा पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1A) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 23 जुलाई के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट सभी बिंदुओं पर स्वतंत्र रूप से फैसला देगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर किसी प्रकार का हस्तक्षेप न्यायिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं होगा।
