डॉलर की मजबूती ने तोड़ी कमर, आयात और महंगाई बढ़ने की आशंका
नई दिल्ली : भारतीय मुद्रा बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को रुपया 91.93 (प्रोविजनल) पर बंद हुआ, जो भारतीय मुद्रा के इतिहास का रिकॉर्ड निचला स्तर है। डॉलर की वैश्विक मजबूती, विदेशी पूंजी की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर जबरदस्त दबाव बना दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट सिर्फ एक कारोबारी दिन की नहीं, बल्कि लंबे समय से बन रहे दबाव का नतीजा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति, वैश्विक अनिश्चितता और उभरते बाजारों से निवेशकों की दूरी ने डॉलर को मजबूत किया है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा है।
91.93 का स्तर क्यों है अहम?
91.93 का स्तर मनोवैज्ञानिक और तकनीकी दोनों रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस स्तर पर रुपये का बंद होना संकेत देता है कि बाजार में अभी स्थिरता लौटने में समय लग सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर रुपये में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आयातकों की लागत और बढ़ सकती है।
महंगाई और चालू खाता घाटे पर पड़ेगा असर
रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट का सीधा असर कच्चे तेल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। इससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है। साथ ही चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
आरबीआई और सरकार की बढ़ी चिंता
मुद्रा बाजार की मौजूदा स्थिति ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। बाजार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि केंद्रीय बैंक रुपये को संभालने के लिए डॉलर बिक्री, मौद्रिक हस्तक्षेप या नीतिगत कदम उठाता है या नहीं।
क्या बोले विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रुपये की चाल निर्भर करेगी। अगर डॉलर में मजबूती जारी रही, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, किसी भी सकारात्मक वैश्विक संकेत या आरबीआई के हस्तक्षेप से रुपये में सीमित सुधार देखने को मिल सकता है।
