2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर के फैसले को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, सरकार ने कहा- ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क
नई दिल्ली: यूपीआई के जरिए होने वाले बड़े कारोबारी भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किए जाने को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के दबाव के आगे झुक रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से यूपीआई पर लगाए गए शुल्क को वापस लेने की मांग की है। उनके आरोपों को कांग्रेस ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से भी जोड़ा है।हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया एमडीआर ग्राहकों से लिया जाने वाला शुल्क नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह शुल्क कारोबारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लागू होगा और ग्राहकों से यूपीआई भुगतान करने के लिए कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर
राष्ट्रीय भुगतान निगम ने 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से कारोबारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने की घोषणा की है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। 2,000 रुपये तक के छोटे कारोबारी भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंकों को कारोबारियों से वसूले जाने वाले एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डालने से रोकने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने यूपीआई शुल्क के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने झुक रहे हैं और यूपीआई से जुड़े फैसले में अमेरिकी दबाव की भूमिका है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से मजबूती से खड़े होने और अमेरिका के सामने नहीं झुकने की बात कही। उनके बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने कथन का भी संदर्भ दिया गया। राहुल गांधी की ओर से यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब नए एमडीआर ढांचे को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस ने यूपीआई शुल्क को अमेरिका से क्यों जोड़ा?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने यूपीआई पर लागू शून्य एमडीआर व्यवस्था को खत्म करने का फैसला अमेरिकी दबाव में लिया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को अमेरिका की व्यापार और तकनीकी नीतियों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक हमला करते हुए ‘एनओटीए’ का नया अर्थ भी बताया और इसे नरेंद्र का लगातार ट्रंप तुष्टीकरण बताया। ये कांग्रेस के आरोप हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को गलत सूचना करार दिया है और कहा है कि सरकार ने साफ किया है कि एमडीआर ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।
सरकार ने शुल्क को लेकर क्या कहा?
केंद्र सरकार का कहना है कि एमडीआर ग्राहक पर लगाया गया शुल्क नहीं है। यह कारोबारी भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई अनुप्रयोग प्रदाताओं के बीच साझा किया जाने वाला शुल्क है। सरकार के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सभी यूपीआई लेनदेन निशुल्क रहेंगे। वहीं 2,000 रुपये तक के छोटे कारोबारी भुगतान भी शुल्क से बाहर रखे गए हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई पर कोई मासिक सीमा या निशुल्क लेनदेन की संख्या की सीमा नहीं होगी।
किसे देना होगा शुल्क और कौन रहेगा बाहर?
नई व्यवस्था के तहत मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से कारोबारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा होगी। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदानों जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का निश्चित एमडीआर रखा गया है। वहीं छोटे कारोबारी, जो क्यूआर के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक यूपीआई भुगतान प्राप्त करते हैं, उनके लिए एमडीआर से छूट का प्रावधान जारी रहेगा।
यूपीआई शुल्क पर जारी है राजनीतिक घमासान
यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस इसे आम लोगों और कारोबारियों पर संभावित आर्थिक बोझ से जोड़ रही है, जबकि सरकार का कहना है कि ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान निशुल्क रहेगा और शुल्क कारोबारी भुगतान व्यवस्था के भीतर निर्धारित किया गया है। इस मुद्दे पर राहुल गांधी के हमले के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। अब विवाद का प्रमुख केंद्र यह है कि नए एमडीआर का वास्तविक आर्थिक प्रभाव कारोबारियों पर कितना पड़ेगा और क्या इसका कोई अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों तक पहुंचता है। सरकार ने फिलहाल स्पष्ट किया है कि एमडीआर का शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।
