सुल्तानपुर : खबर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से है, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। मंगलवार को सुल्तानपुर की MP/MLA स्पेशल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। करीब 40 मिनट तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने राहुल गांधी को तलब कर लिया है। कोर्ट ने उन्हें 19 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
इस सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील काशी शुक्ला ने गवाह रामचंद्र दुबे से जिरह पूरी की। वहीं, शिकायतकर्ता भाजपा नेता विजय मिश्र की ओर से अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कोर्ट को बताया कि अब उनकी तरफ से कोई और गवाह पेश नहीं किया जाएगा। इसके बाद स्पेशल जज शुभम वर्मा ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत राहुल गांधी को तलब किया। इस धारा के तहत आरोपी को अपने खिलाफ आए साक्ष्यों पर खुद अदालत में सफाई देने का मौका दिया जाता है। इसका साफ मतलब है कि कोर्ट राहुल गांधी का पक्ष सीधे सुनना चाहती है, ताकि बिना सुने किसी को दोषी न ठहराया जाए।
यह मामला करीब 7 साल पुराना है। आरोप है कि वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने उस समय कहा था कि जो पार्टी ईमानदारी और शुचिता की बात करती है, उसका अध्यक्ष हत्या का आरोपी है। इसी बयान को लेकर सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्र ने 4 अगस्त 2018 को मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
इस केस में इससे पहले भी राहुल गांधी को अदालत का सामना करना पड़ा था। 20 फरवरी 2024 को वह गैर-जमानती वारंट पर सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए थे। उस दौरान राहुल गांधी ने अदालत से कहा था कि वे निर्दोष हैं और उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो बॉन्ड पर जमानत दी थी। मामले की पृष्ठभूमि में जज बी.एच. लोया की मौत का भी जिक्र है। जज लोया दिसंबर 2014 में नागपुर में एक शादी समारोह के दौरान निधन हो गया था। वे गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अमित शाह आरोपी थे। हालांकि जज लोया के परिवार और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने उनकी मौत को प्राकृतिक बताया था और SIT जांच की मांग खारिज कर दी गई थी। अब 19 जनवरी को राहुल गांधी को खुद कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा। इस सुनवाई पर न सिर्फ राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हैं, बल्कि यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में बहस का मुद्दा बनता नजर आ रहा है।
