नई दिल्ली : देश में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के उद्देश्य से भारत सरकार की जल जीवन मिशन – हर घर जल योजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। अक्टूबर 2025 तक देश के करीब 15 करोड़ 72 लाख परिवारों तक नल से जल पहुंचाया जा चुका है। लेकिन इसी बीच देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर से आई एक खबर ने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण 20 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। हालांकि, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौतों का जिक्र किया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में 6 मौतें दर्ज हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि दूषित पानी से हजारों लोग बीमार हुए हैं। जांच में सामने आया कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था। शौचालय का गंदा सीवेज पानी सीधे पीने के पानी की लाइन में मिल रहा था, जिससे यह भयावह स्थिति पैदा हुई।
यह मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। उज्जैन के वार्ड क्रमांक 34, जयसिंहपुरा इलाके में पिछले दो महीनों से नलों से काला, बदबूदार और नाली जैसा पानी आ रहा है। करीब 265 परिवार मजबूरी में इसी पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन संबंधित विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं।
भोपाल की बात करें तो नगर निगम की ताजा जांच में शहर के चार इलाकों के पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें से तीन जगहों पर खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। रिपोर्ट सामने आते ही नगर निगम ने प्रभावित इलाकों में भूजल के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सलाह दी है और लोगों से ग्राउंड वाटर का उपयोग न करने को कहा गया है।
वहीं, गुजरात की राजधानी गांधीनगर में टाइफाइड के मामलों में अचानक तेज़ बढ़ोतरी देखी गई है। बीते तीन दिनों में 100 से अधिक मरीज, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं, सिविल अस्पताल में भर्ती हुए हैं। जांच में सामने आया कि सेक्टर 24, 25, 26, 28 और आदिवाड़ा क्षेत्रों के पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए हैं। आशंका है कि दूषित पानी की वजह से ही टाइफाइड फैला है। एक ओर सरकार हर घर जल योजना की सफलता के आंकड़े गिना रही है, तो दूसरी ओर दूषित पानी से हो रही मौतें और बीमारियां प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल रही हैं। सवाल साफ है क्या सिर्फ नल से पानी पहुंचाना ही काफी है, या उसकी शुद्धता की जिम्मेदारी भी कोई लेगा?
