नई दिल्ली : शुक्रवार को देश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित राजघाट पर श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने मौन रखकर राष्ट्रपिता के योगदान को याद किया और उनके विचारों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों द्वारा प्रार्थना सभाएं, स्वच्छता अभियान, सत्य और अहिंसा पर आधारित विचार गोष्ठियां आयोजित की गईं। कई स्थानों पर गांधी जी के जीवन और उनके सिद्धांतों पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावपूर्ण संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर उनका शत-शत नमन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का स्वदेशी पर विशेष बल रहा, जो आज विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का आधारस्तंभ बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी जी का व्यक्तित्व और उनका कृतित्व देशवासियों को कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में महात्मा गांधी से जुड़ा एक वीडियो साझा किया और उसमें उनके अहिंसा के सिद्धांत को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अहिंसा में वह शक्ति है, जो बिना हथियार के पूरी दुनिया को बदल सकती है। उन्होंने संस्कृत श्लोक के माध्यम से अहिंसा के महत्व को भी दोहराया और इसे सत्य तथा धर्म का सर्वोच्च मार्ग बताया।
महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही मजबूत मानी जाती है। सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता जैसे सिद्धांत न केवल स्वतंत्रता आंदोलन के समय बल्कि वर्तमान दौर में भी देश और समाज को दिशा देने वाले हैं। वैश्विक स्तर पर जब हिंसा, संघर्ष और असहिष्णुता की घटनाएं सामने आती हैं, तब गांधी जी का अहिंसा का मार्ग और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
गांधी जी की पुण्यतिथि पर यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी से होता है। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही एक समरस, शांतिपूर्ण और आत्मनिर्भर समाज की कल्पना साकार की जा सकती है। देश ने एक बार फिर राष्ट्रपिता को याद करते हुए उनके विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प दोहराया।
