पीलीभीत (पूरनपुर): दीपावली का पर्व नजदीक आते ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर अलर्ट हो गया है। अंधविश्वास के चलते उल्लुओं के शिकार और तस्करी की आशंका को देखते हुए तराई के जंगलों में निगरानी बढ़ा दी गई है। मान्यता है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी के वाहन उल्लू की बलि देने से सुख-समृद्धि मिलती है। इसी तरह की भ्रामक मान्यताओं के चलते हर साल दीपावली के आसपास उल्लुओं के शिकार की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
पांचों रेंज में बढ़ाई गई गश्त
जंगल में शिकारियों की घुसपैठ रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जिले की पांचों रेंज में वनकर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। डिप्टी डायरेक्टर ने सभी रेंज अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जंगल से सटे क्षेत्रों के साथ ही भारत-नेपाल सीमा से लगे वन क्षेत्र में भी विशेष निगरानी की जा रही है।
अंधविश्वास का फायदा उठा सकते हैं शिकारी
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि दीपावली के मद्देनजर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सभी पांचों रेंज में वनकर्मियों की टीमें सघन गश्त कर रही हैं। उन्होंने बताया कि दीपावली के आसपास तांत्रिक क्रियाओं और अंधविश्वास के चलते उल्लुओं की मांग बढ़ने की आशंका रहती है। इसका फायदा उठाकर शिकारी वन क्षेत्रों में सक्रिय हो सकते हैं। इसे देखते हुए वनकर्मियों की टीमें गठित कर नियमित रूप से जंगल में गश्त कराई जा रही है।
शिकार करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
पीटीआर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वालों पर नजर रखी जा रही है। यदि उल्लुओं के शिकार या तस्करी का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने और बेजुबान पक्षियों की रक्षा करने की अपील की है।
रिपोर्ट: ऋतिक द्विवेदी
