लेखक
संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री
बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन
बरेली : भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय (Per Capita Net National Income) में पिछले एक दशक में लगभग 57.5% की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में यह 72,805 थी, जो अब 2024-25 में बढ़कर 1,14,710 तक पहुंच गई है। यह आर्थिक प्रगति निस्संदेह भारत की विकास यात्रा को दर्शाती है, लेकिन यह कहानी अधूरी है। क्योंकि, यह विकास राज्यों के बीच समान रूप से नहीं बंटा है।
किन राज्यों में धीमी गति?
उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम रही है। इससे साफ है कि आर्थिक नीतियों का लाभ हर क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है।
टॉप 5 राज्य जहां प्रति व्यक्ति आय सबसे ज्यादा
कर्नाटक में 2,00,000+, तमिलनाडु 1,96,309, हरियाणा 1,94,285, तेलंगाना 1,87,912, महाराष्ट्र 1,76,678 अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें तो भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,878 के करीब है, जो इसे विकासशील अर्थव्यवस्था की श्रेणी में रखती है, तो वहीं, दुनिया के समृद्ध देशों में लक्समबर्ग 129,810, आयरलैंड 104,270,स्विट्ज़रलैंड 100,410, नॉर्वे 87,740, सिंगापुर 84,730, अमेरिका 69,000 और चीन 10,000 है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए न सिर्फ GDP में बल्कि हर नागरिक की आय में वृद्धि करनी होगी।
संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन, ने इस अवसर पर कहा कि “भारत को यदि वैश्विक आर्थिक शक्ति बनना है, तो सिर्फ कुल GDP नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय में समतुल्यता लाना बेहद आवश्यक है। उत्पादकता, उच्च शिक्षित मानव संसाधन और क्षेत्रीय विकास में निवेश ही इसका समाधान है।”
