कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत इन दिनों चुनावी माहौल के चलते पूरी तरह गरमाई हुई है। इसी कड़ी में असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को मुर्शिदाबाद में एक बड़ी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कई अहम बयान दिए और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने संबोधन में खास तौर पर कमजोर वर्गों और मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को उठाया और कहा कि लंबे समय से इन वर्गों के साथ अन्याय होता रहा है।
रैली के दौरान ओवैसी ने हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से वोट देने की अपील की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह गठबंधन किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के हक के लिए किया गया है जो अब तक मुख्यधारा की राजनीति में उपेक्षित रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि बंगाल में एक ऐसा राजनीतिक विकल्प तैयार करने की जरूरत है, जो वास्तव में जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझे और उनका समाधान करे।
अपने भाषण में उन्होंने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। ओवैसी ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता में रही पार्टियों ने मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन वादों को भुला दिया जाता है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि इतने वर्षों के बाद भी मुस्लिम समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।
ओवैसी ने अपने संबोधन में कांग्रेस और वाम दलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 50 वर्षों में मुस्लिम समुदाय ने इन पार्टियों को समर्थन दिया, लेकिन बदले में उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। उन्होंने कहा कि अगर किसी समाज को आगे बढ़ना है, तो उसे अपना नेतृत्व खुद तैयार करना होगा और अपनी राजनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाना होगा।
रैली में उन्होंने एक अहम बात यह भी कही कि आज की राजनीति में वही समाज आगे बढ़ता है, जिसका अपना मजबूत नेतृत्व होता है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को अब तक एक “वोटिंग मशीन” की तरह इस्तेमाल किया गया है। ओवैसी ने लोगों से अपील की कि वे अब इस स्थिति को बदलें और ऐसे नेताओं को चुनें, जो उनके मुद्दों को सही मायनों में समझते हों और उनके लिए आवाज उठाने का साहस रखते हों।
उन्होंने यह भी दावा किया कि हुमायूं कबीर के साथ बना यह नया गठबंधन आने वाले चुनावों में बड़ा असर डालेगा और सत्ताधारी दल के लिए चुनौती साबित होगा। ओवैसी ने कहा कि यह गठबंधन केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक सोच को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि अगर उन्हें मौका मिला, तो वे हर वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाएंगे और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देंगे।
इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए और कहा कि आम जनता, खासकर गरीब और कमजोर वर्ग, आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान देने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर काम करना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं और राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होना है। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 4 मई को मतगणना होगी और चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
चुनावी तारीखों के ऐलान के बाद से ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। विभिन्न दलों के नेता लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा सके। ऐसे में ओवैसी की यह रैली और उनके बयान भी बंगाल की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि यह नया गठबंधन चुनावी मैदान में कितना प्रभाव डाल पाता है और क्या यह वास्तव में उन वर्गों का समर्थन हासिल कर पाता है, जिनके नाम पर यह राजनीति की जा रही है। फिलहाल इतना जरूर है कि बंगाल का चुनाव इस बार और भी दिलचस्प और मुकाबले वाला होता नजर आ रहा है, जहां हर दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है।
