नई दिल्ली : आंध्र प्रदेश के डॉ. बीआर अंबेडकर कोनसीमा जिले में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन यानी ओएनजीसी के गैस कुएं में लगी आग को बुझाने के प्रयास शुक्रवार को भी जारी रहे। ओएनजीसी की टीमें लगातार हालात पर काबू पाने में जुटी हुई हैं।
दरअसल, 5 जनवरी को मोरी और इरसुमंदा गांवों के पास स्थित ओएनजीसी के गैस कुएं ‘मोरी-5’ में गैस रिसाव के बाद भीषण आग भड़क उठी थी। आग की लपटें करीब 20 मीटर ऊंची और लगभग 25 मीटर चौड़ी बताई गई थीं। हालांकि अब आग की तीव्रता में कुछ कमी आई है। ओएनजीसी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल टीमों का पूरा फोकस घटनास्थल से मलबा हटाने पर है। जब तक मलबा पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, तब तक कुएं के मुंह यानी वेलहेड पर तकनीकी कार्रवाई संभव नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि एक से दो दिन में मलबा हटाने का काम पूरा हो सकता है।
तेल और गैस उद्योग की भाषा में इसे ‘ब्लोआउट’ की स्थिति कहा जाता है, जब दबाव नियंत्रण प्रणाली फेल होने पर तेल या गैस अनियंत्रित रूप से बाहर निकलने लगती है। इस घटना के बाद से ओएनजीसी की टीमें पिछले तीन दिनों से आग बुझाने और ब्लोआउट नियंत्रण अभियान में लगातार लगी हुई हैं। यह गैस कुआं कोनसीमा के हरे-भरे और सिंचित क्षेत्र में स्थित है और इसे ओएनजीसी की ओर से प्रोडक्शन एन्हांसमेंट कॉन्ट्रैक्टर के रूप में अहमदाबाद की दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड संचालित कर रही थी। हादसे के बाद ओएनजीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने खुद ऑपरेशनल कंट्रोल संभाल लिया है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि आग पर पूरी तरह काबू पाने के लिए ओएनजीसी अमेरिका की विशेषज्ञ कंपनी ‘वाइल्ड वेल कंट्रोल’ की सेवाएं लेगी या नहीं। यह कंपनी तेल और गैस कुओं में आपात स्थिति और ब्लोआउट से निपटने में विशेषज्ञ मानी जाती है। ओएनजीसी का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाने के साथ-साथ आसपास के इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
