लखनऊ/बहराइच: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बहराइच स्थित सैयद सालार मसूद गाज़ी दरगाह पर लगने वाले वार्षिक जेठ मेले को लेकर राज्य सरकार द्वारा जताई गई आपत्तियों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि “सामान्य परिस्थितियों में लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करना राज्य का अधिकार नहीं है।” अदालत ने कहा कि ऐसी परंपराएं सांस्कृतिक सौहार्द का हिस्सा होती हैं और इन्हें छोटे कारणों से रोका नहीं जा सकता।
जानें पूरा मामला ?
बहराइच स्थित वक्फ नंबर 19 दरगाह शरीफ द्वारा दायर याचिका में प्रशासन द्वारा जेठ मेले (उर्स) की अनुमति न दिए जाने को चुनौती दी गई थी। जिला प्रशासन ने अनुमति इस आधार पर रोकी थी कि क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा है और राष्ट्रविरोधी तत्वों की घुसपैठ की आशंका है। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव और नेपाल सीमा से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भीड़ नियंत्रण चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कोर्ट का कड़ा रुख
न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने कहा कि 17 मई को पारित अंतरिम आदेश के बाद मेला शांतिपूर्वक और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ, जिससे साबित होता है कि राज्य की चिंताएं निर्मूल थीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उर्स की अनुमति से इंकार का आदेश अब अप्रभावी हो चुका है क्योंकि मेला संपन्न हो गया है। इसके साथ ही दरगाह प्रबंधन को भविष्य में बेहतर व्यवस्था, सीसीटीवी और सुरक्षा उपायों के निर्देश भी दिए।
