मऊ: जिले में साइबर ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका सामने आया है, जिसने शादी के सीजन की खुशियों को चिंता में बदल दिया है। एक ओर जहां शादियों का मौसम पूरे शबाब पर है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों ने शादी के कार्ड को ही ठगी का हथियार बना लिया है। ताज़ा मामला मऊ जनपद का है, जहां साइबर ठगों ने एक समाजवादी पार्टी के नेता का मोबाइल हैक कर उनके परिचितों को निशाना बनाया और लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला मऊ जनपद से जुड़ा है। यहां सपा की युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अखिलेश सिंह राठौर का मोबाइल फोन साइबर ठगों ने शुक्रवार देर शाम हैक कर लिया। मोबाइल हैक होने के बाद ठगों ने उनके व्हाट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल करते हुए संपर्क सूची में मौजूद करीब 7000 लोगों को एक डिजिटल शादी का कार्ड भेजा। यह शादी का कार्ड सामान्य पीडीएफ या इमेज फाइल न होकर APK फाइल के रूप में भेजा गया था। जैसे ही लोगों ने इसे शादी का कार्ड समझकर डाउनलोड या इंस्टॉल किया, उनके मोबाइल फोन में मैलवेयर प्रवेश कर गया। इसके बाद हैकरों को पीड़ितों के फोन का पूरा रिमोट एक्सेस मिल गया। देखते ही देखते कई लोगों के बैंक खातों से पैसे गायब होने लगे।
अखिलेश सिंह राठौर ने बताया कि जब उनका मोबाइल दोबारा ठीक हुआ, तब उन्हें इस पूरी ठगी का पता चला। तब तक करीब 50 लोगों के खातों से लाखों रुपये निकाले जा चुके थे। पीड़ितों ने तत्काल साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल सक्रिय हुई और त्वरित कार्रवाई करते हुए कई खातों से निकाले गए पैसों को होल्ड करा दिया गया। हालांकि, अभी भी मामले की विस्तृत जांच जारी है।
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल युग में अधिकतर लोग व्हाट्सऐप के माध्यम से शादी के कार्ड पीडीएफ या जेपीजी फाइल में भेजते हैं, जो सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन साइबर अपराधी जानबूझकर APK फाइल भेजते हैं, जो असल में एक एप्लीकेशन होती है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे इंस्टॉल करता है, फोन में खतरनाक वायरस या मैलवेयर सक्रिय हो जाता है। इसके बाद हैकर ओटीपी, बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड, गैलरी और कॉन्टैक्ट्स तक पहुंच बना लेते हैं।
पुलिस और साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें, भले ही वह किसी परिचित के नंबर से ही क्यों न आई हो। शादी के कार्ड या किसी भी दस्तावेज के लिए केवल पीडीएफ, इमेज या भरोसेमंद लिंक का ही उपयोग करें।
