डोना पाउला स्थित घर पर बेहोश मिले दिग्गज अभिनेता, अस्पताल में करीब 45 मिनट तक चला बचाने का प्रयास; 1978 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर
गोवा: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। अभिनेता गोवा के डोना पाउला स्थित अपने आवास पर बेहोश मिले थे। उन्हें तत्काल मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। अस्पताल से जुड़े चिकित्सक ने उनके निधन की पुष्टि की है।
कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल ले जाया गया
नाना पाटेकर को तड़के गंभीर स्वास्थ्य समस्या हुई। उन्हें डोना पाउला स्थित आवास पर बेहोश पाया गया, जिसके बाद अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने लगातार हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन प्रक्रिया के जरिए उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन करीब 45 मिनट की कोशिश के बाद भी उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें सुबह करीब 5 बजकर 10 से 20 मिनट के बीच मृत घोषित किया गया। निधन की सटीक चिकित्सकीय वजह की पुष्टि के लिए आगे की प्रक्रिया भी की जा रही है।
1978 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से बड़े पर्दे पर अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी के साथ मराठी सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। 1980 के दशक में ‘अंकुश’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’ और ‘खामोशी’ जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में स्थापित किया।
गंभीर से हास्य और खलनायक तक निभाए कई किरदार
नाना पाटेकर की खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह की भूमिका तक सीमित नहीं रखा। गंभीर और संवेदनशील किरदारों के साथ उन्होंने हास्य और नकारात्मक भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। इसके अलावा ‘अंगार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अपहरण’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदार दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहे।
तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार फिल्मफेयर पुरस्कार
नाना पाटेकर को अपने शानदार अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता तथा ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें चार फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सेना के साथ जुड़े
नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव भी चर्चा में रहा है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने फिल्मी गतिविधियों से अलग होकर भारतीय सेना के साथ समय बिताया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस की अनुमति के बाद सेना से जुड़ने का अवसर मिला था।
फिल्म निर्माण और लेखन में भी आजमाया हाथ
नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि लेखक और निर्देशक के रूप में भी काम किया। उन्होंने ‘प्रहार’ का निर्देशन और लेखन किया था। मराठी सिनेमा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। सिनेमा के साथ वह सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे और किसानों तथा ग्रामीण समुदायों के लिए काम करने वाली संस्था के माध्यम से योगदान दिया।
नाना पाटेकर की आखिरी फिल्मों में ‘हाउसफुल 5’ और ‘ओ’रोमियो’
अपने करियर के अंतिम दौर तक नाना पाटेकर फिल्मों में सक्रिय रहे। वर्ष 2025 में वह ‘हाउसफुल 5’ में नजर आए थे। इसके अलावा ‘ओ’रोमियो’ और ‘सूबेदार’ से भी उनका जुड़ाव रहा। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने करीब पांच दशक तक अभिनय की अलग-अलग विधाओं में अपनी पहचान बनाए रखी। नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है।
