मिर्जापुर में रेबीज से जंग जीत गया 15 साल का करन, 22 दिन के इलाज के बाद हुआ पूरी तरह स्वस्थ
कुत्ते के काटने के बाद एडवांस स्टेज में पहुंची थी बीमारी, पानी से डरने और मुंह से लार आने जैसे लक्षण दिखे; डॉक्टरों ने मामले को बताया दुर्लभ
मिर्जापुर: कुत्ते के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी को बेहद गंभीर और जानलेवा माना जाता है। आमतौर पर एक बार बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे डॉक्टर दुर्लभ और अध्ययन योग्य मान रहे हैं। यहां 15 साल के एक बच्चे ने गंभीर रेबीज संक्रमण के बाद 22 दिन के उपचार से स्वस्थ होने में सफलता पाई है।
दिसंबर में आवारा कुत्ते ने काटा था
मिर्जापुर के कछवां बाजार निवासी 15 वर्षीय करन को दिसंबर 2025 की शुरुआत में एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका शुरुआती उपचार स्थानीय स्तर पर कराया गया। करन को रेबीज के शुरुआती दो टीके भी लगाए गए, लेकिन उपचार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद बीमारी बढ़ने लगी और मार्च 2026 तक करन की हालत तेजी से बिगड़ गई। उसमें रेबीज से जुड़े गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे।
पानी से डरने लगा, कुत्ते जैसी आवाजें निकालने लगा
परिजनों के मुताबिक, करन पानी से डरने लगा था। उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी और वह असामान्य व्यवहार करने लगा था। यहां तक कि वह कुत्ते जैसी आवाजें भी निकालने लगा। हालत बिगड़ने के बाद परिजन उसे कई जगह इलाज के लिए ले गए। बताया गया कि परिवार ने उसे मंदिर ले जाकर झाड़-फूंक भी कराई। स्थिति गंभीर होने पर उसे बड़े अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया।
22 दिन तक रखा गया अलग, सात टीके लगाए गए
इसके बाद करन को वाराणसी के हरहुआ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। यहां चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया। उसे करीब 22 दिनों तक अलग रखकर लगातार निगरानी में उपचार दिया गया। उपचार के दौरान करन को पांच नियमित रेबीज टीकों के अलावा दो अतिरिक्त विशेष खुराक भी दी गईं। इस तरह उसे कुल सात टीके लगाए गए। उपचार के दौरान धीरे-धीरे उसके शरीर ने प्रतिक्रिया देना शुरू किया और उसकी स्थिति में सुधार आने लगा।
इलाज के बाद स्कूल जाने लगा करन
चिकित्सकों के अनुसार, उपचार के बाद करन की हालत में लगातार सुधार हुआ। नसों से जुड़े संक्रमण के लक्षण कम हुए और वह पूरी तरह होश में आ गया। 22 दिन के उपचार के बाद उसकी स्थिति सामान्य बताई गई है। अब करन स्वस्थ होकर स्कूल भी जाने लगा है। गंभीर अवस्था में पहुंच चुके रेबीज संक्रमण से उसके स्वस्थ होने को चिकित्सकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉक्टर बोले- मामले पर होना चाहिए शोध
मिर्जापुर के चिकित्सक संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, रेबीज के लक्षण सामने आने के बाद मरीज के बचने की संभावना बेहद कम मानी जाती है। ऐसे में करन का गंभीर अवस्था के बाद स्वस्थ होना महत्वपूर्ण है। चिकित्सकों की ओर से करन की एंटीबॉडी की जांच भी कराई जा रही है। इस मामले को लेकर आगे शोध किए जाने की जरूरत बताई गई है, ताकि यह समझा जा सके कि गंभीर संक्रमण के बावजूद उसके शरीर ने उपचार के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया दी।
कुत्ते के काटने पर तुरंत कराएं उपचार
चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि कुत्ते या किसी अन्य संदिग्ध जानवर के काटने के बाद लापरवाही न करें। घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव के टीके और अन्य आवश्यक उपचार कराना बेहद जरूरी है। करन का स्वस्थ होना राहत की बात है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे दुर्लभ मामले को सामान्य स्थिति मानकर रेबीज से बचाव में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
