लोकसभा में उठाया अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति का मुद्दा, मंत्री किरेन रिजिजू के जवाब का हवाला देते हुए बोले- 2021-22 के बाद योजनाओं को नहीं मिली मंजूरी, हजारों छात्र प्रभावित
बरेली/नई दिल्ली : यूपी की आंवला लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। सांसद ने कहा, “सरकार ही नहीं चाहती कि अल्पसंख्यक शिक्षित हों।”सांसद नीरज मौर्य ने यह बयान लोकसभा में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़े अपने संसदीय प्रश्न के जवाब के बाद दिया। उनके अनुसार, अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी) के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए पिछले तीन वर्षों से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) पर आवेदन और नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है।
सत्र 2021-22 के बाद आगे जारी रखने की मंजूरी नहीं दी
सांसद ने दावा किया कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के लोकसभा में दिए गए जवाब में यह स्वीकार किया गया कि इन तीनों छात्रवृत्ति योजनाओं को शैक्षणिक सत्र 2021-22 के बाद आगे जारी रखने की मंजूरी नहीं दी गई। इसके साथ ही प्रभावित छात्रों के लिए किसी वैकल्पिक वित्तीय सहायता या राहत योजना का भी कोई प्रस्ताव नहीं है। नीरज मौर्य ने आरोप लगाया कि छात्रवृत्ति बंद होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक छात्र फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं और उनकी पढ़ाई बीच में छूट रही है।
दोबारा छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू की मांग
उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति योजनाओं को दोबारा शुरू करने और वंचित छात्रों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, 2021-22 के बाद इन योजनाओं को आगे बढ़ाने की स्वीकृति नहीं दी गई है तथा वैकल्पिक वित्तीय सहायता का भी कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने अपने उत्तर में सांसद द्वारा लगाए गए अन्य राजनीतिक आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
