पीआरएस रिपोर्ट में सांसदों की उपस्थिति, बहस और सवाल पूछने के आंकड़े आए सामने; मथुरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद के सांसदों के प्रदर्शन में दिखा बड़ा अंतर
नई दिल्ली/आगरा : लोकसभा चुनाव में जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए सांसदों की जिम्मेदारी संसद में अपने क्षेत्र की समस्याओं और जनता की आवाज उठाने की होती है। इसी बीच पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने जून 2024 से अप्रैल 2026 तक के लोकसभा प्रदर्शन का आंकड़ा जारी किया है। रिपोर्ट में आगरा मंडल के मथुरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद के सांसदों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला है। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले यह रिपोर्ट चर्चा का विषय बन गई है।
उपस्थिति में सबसे पीछे रहीं हेमा मालिनी
रिपोर्ट के अनुसार 18वीं लोकसभा में राष्ट्रीय औसत उपस्थिति 85 प्रतिशत, जबकि उत्तर प्रदेश का औसत 92 प्रतिशत रहा। मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव की उपस्थिति 81 प्रतिशत दर्ज की गई। खास बात यह रही कि लोकसभा के पहले सत्र में उनकी उपस्थिति 100 प्रतिशत रही थी। वहीं, मथुरा सांसद हेमा मालिनी की कुल उपस्थिति सिर्फ 39 प्रतिशत रही। शीतकालीन सत्र 2025 में उनकी उपस्थिति शून्य दर्ज की गई। दूसरी ओर फिरोजाबाद सांसद अक्षय यादव की कुल उपस्थिति 79 प्रतिशत रही।
बहस में डिंपल सबसे आगे, अक्षय सबसे पीछे
संसद में विभिन्न मुद्दों पर हुई बहसों में भी तीनों सांसदों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला। डिंपल यादव ने 9 बहसों में हिस्सा लिया। उन्होंने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, सोशल मीडिया के प्रभाव और अन्य समसामयिक विषयों पर अपनी बात रखी। हेमा मालिनी ने कम उपस्थिति के बावजूद 7 बहसों में भाग लिया और मथुरा को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने के लिए विशेष पैकेज की मांग उठाई। अक्षय यादव ने पूरे कार्यकाल में केवल 1 बहस में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने फिरोजाबाद के कांच उद्योग से जुड़े श्रमिकों के लिए ईएसआई अस्पताल की मांग रखी।
सवाल पूछने में हेमा मालिनी सबसे आगे
सरकार से जवाब मांगने के लिए सांसदों द्वारा पूछे गए प्रश्नों में हेमा मालिनी सबसे आगे रहीं। उन्होंने संसद में 25 प्रश्न पूछे, जिनमें ब्रज क्षेत्र में पुरातात्विक उत्खनन, नमो ड्रोन दीदी योजना और जल ही अमृत योजना जैसे विषय शामिल रहे। डिंपल यादव ने 19 प्रश्न पूछे। उन्होंने मैनपुरी के रेलवे प्रोजेक्ट, लहसुन किसानों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दे उठाए। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा फिरोजाबाद सांसद अक्षय यादव का रहा। रिपोर्ट के मुताबिक करीब दो वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने संसद में एक भी प्रश्न नहीं पूछा।
मानसून सत्र से पहले बढ़ीं जनता की उम्मीदें
20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले जारी इस रिपोर्ट ने सांसदों के संसदीय प्रदर्शन पर नई बहस छेड़ दी है। अब क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि उनके जनप्रतिनिधि संसद में अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।
