बरेली में बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने कर्मचारियों और श्रमिकों ने किया प्रदर्शन
बरेली : केंद्रीय श्रम संगठनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को बरेली में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हल्ला बोल दिया। सुबह 11:30 बजे बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने विशाल प्रदर्शन सभा शुरू हुई। जिसका उद्घाटन प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच की टीम के जोशीले जनगीतों से हुआ। सभा की अध्यक्षता मुकेश सक्सेना ने की और संचालन संजीव मेहरोत्रा, एवं ललित चौधरी ने किया। शहर के विभिन्न संगठनों से आए कर्मचारियों ने रैली की शक्ल में प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर ‘निजीकरण विरोधी’,‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ जैसे नारों से माहौल को गुंजा दिया।
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

कर्मचारी नेता पी.के. महेश्वरी ने कहा कि सरकार बैंकों की हिस्सेदारी कम कर रही है, जो निजीकरण की ओर संकेत है। गीता शांत (बीमा कर्मी संघ): सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को पूंजीपतियों को सौंप रही है। ध्यान चंद्र मौर्य (ट्रेड यूनियन फेडरेशन) चार लेबर कोड श्रमिक अधिकारों को खत्म करने की साजिश हैं। रंजन मोहले (बैंक इम्प्लाई यूनियन): महंगाई व बेरोजगारी की वजह सरकार की गलत आर्थिक नीतियां हैं। आशीष गंगवार (राज्य कर्मचारी महासंघ): ठेका प्रथा को बंद कर, रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। राजेंद्र सिंह (नगर निगम): स्टाफ की कमी से कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव है। भारी बारिश के बावजूद कर्मचारियों ने प्रदर्शन जारी रखा और सरकार से जनविरोधी नीतियों को तुरंत वापस लेने की मांग की।
