फिल्म एक्टर शाहरुख खान से खास रिश्ता
लेखक
मुहम्मद साजिद
भारत की आज़ादी की लड़ाई में कई ऐसे वीर क्रांतिकारी हुए, जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए अंग्रेजों के अत्याचार का मुकाबला किया। इनमें से एक महान योद्धा थे मेजर जनरल शाहनवाज खान, जिन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे न केवल आज़ादी की लड़ाई के धुरंधर सेनानी थे, बल्कि बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान के नाना भी थे।
शाहनवाज खान की बहादुरी की मिसाल इतिहास में दर्ज
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जनरल शाहनवाज खान का जन्म 24 जनवरी 1914 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) के मटौर गाँव में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेवा शुरू की, लेकिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस के प्रभाव में आकर 1943 में आजाद हिंद फौज (INA) का हिस्सा बन गए। 1945 में बर्मा में ब्रिटिश सेना ने उन्हें गिरफ्तार किया। इसके बाद ‘लाल किला कोर्ट मार्शल ट्रायल’ हुआ। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनकी वकालत की। इस दबाव में ब्रिटिश सरकार को उन्हें रिहा करना पड़ा।
लाल किले से ब्रिटिश झंडा उतार कर फहराया तिरंगा
शाहनवाज खान ने एक ऐतिहासिक काम किया। उन्होंने लाल किले से ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर भारतीय तिरंगा फहराया। यह घटना भारतीय आज़ादी के संघर्ष में एक प्रतीक बन गई। उनकी इस बहादुरी ने युवाओं में देशभक्ति की आग भड़काई।
शाहरुख खान से गहरा नाता, नाना थे शाहनवाज खान
यह कम ही लोग जानते हैं कि शाहनवाज खान बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान के नाना थे। शाहरुख की मां, लतीफ फातिमा, शाहनवाज खान की गोद ली हुई बेटी थीं। शाहनवाज खान ने लतीफ फातिमा की परवरिश की, और उनका विवाह भी उनके घर पर हुआ था।
जंग-ए-आजादी के बाद चार बार सांसद
स्वतंत्रता के बाद, शाहनवाज खान चार बार सांसद चुने गए और 23 साल तक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में भी सेवा दी। वे मेरठ से लगातार प्रतिनिधित्व करते रहे। 9 दिसंबर,1983 को उनका निधन हो गया, और उन्हें मौलाना अबुल कलाम आजाद के बगल में दफनाया गया।
