सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्कूल मर्जर का फैसला वापस लेने को बताया ‘पीडीए पाठशाला’ आंदोलन की महाजीत
लखनऊ : यूपी सरकार ने सरकारी स्कूलों के मर्जर (विलय) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने साफ कर दिया है कि अब एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित किसी भी स्कूल का मर्जर नहीं होगा। इसके साथ ही जिन स्कूलों में 50 से अधिक छात्र हैं। उन्हें भी बंद नहीं किया जाएगा। इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य है, कि बच्चों की शिक्षा में न्यूनतम बाधा और संसाधनों का अधिकतम उपयोग। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार के स्कूल मर्जर फैसला वापस लेना को सोशल मीडिया पर ‘पीडीए पाठशाला’ आंदोलन की महाजीत बताया। बोले, शिक्षा का अधिकार अखंड होता है, और रहेगा। शिक्षा विरोधी भाजपा की ये नैतिक हार है।
जानें क्या बोले बेसिक शिक्षा मंत्री
यूपी सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि “स्कूलों की पेयरिंग बच्चों के हित में की जा रही है। केवल कम संसाधनों और छात्रों वाले स्कूलों को ही मर्ज किया जाएगा।” पेयरिंग प्रक्रिया के तहत अब तक 10,000 विद्यालयों की पहचान की गई है। 1.32 लाख परिषदीय स्कूल प्रदेश में चल रहे हैं, सभी यथावत रहेंगे। शिक्षक या सहायक अध्यापक की एक भी पोस्ट समाप्त नहीं की जाएगी।
मर्जिंग के नए मानक क्या हैं?
उन्होंने कहा कि दूरी 1 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित स्कूल मर्ज नहीं होगी। इसके साथ ही छात्र संख्या 50 से अधिक छात्रों वाले स्कूल मर्ज नहीं किया जाएगा। शिक्षक-छात्र अनुपात प्री-प्राइमरी:म 30:1, अपर प्राइमरी 35:1, स्टाफ 3 अध्यापक, 2 सहायक अध्यापक + 1 शिक्षा मित्र।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूछा था कि”स्कूल क्यों बंद कर रहे हो, शिक्षा क्यों छीन रहे हो?”। अब सरकार के इस फैसले को विपक्ष पर जवाबी वार माना जा रहा है।
